भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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( २२४ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । निरुत्थकं मृतं हेम तथा द्वादशरक्तिकम् । आर्द्रकस्य रसेनैव धात्र्याश्च स्वरसेन च ॥ ३९ ॥ भावयित्वा प्रदातव्यो माषद्वयप्रमाणतः । भक्षयेत्प्रातरुत्थाय पथ्यं भक्षयेथेप्सितम् ॥ ४० ॥ अग्निमान्यमजीर्णञ्च दुर्नामं ग्रहणीं जयेत् । आमाजीर्णप्रशमनः सर्वरोगनिषूदनः ॥ नाशयेदुदरान्रोगान्विष्णुचक्रमिवासुरान् ॥ ४१ ॥ पारा, गंधक, लोहभस्म, अभ्रकभस्म, नागभस्म, चित्रकमूल, निशोथ, सुहागा, जायफल, हींग, दालचीनी, इलायची, नागरमोथा, लौंग, तेजपात, जीरा, अजवायन, सोंठ, सेंधानमक, कालीमिरच और चांदीभस्म, यह प्रत्येक औषधि एक एक तोला, सोनाभस्म १२ रत्ती इन सबको एकत्र पीसकर अदरक और आंवलोंके रसमें अलग २ भावना देकर