भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 256, कुल 584 में से

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पृष्ठ 256

(२३०) रसेन्द्रसारसंग्रह । तोले, थूहरका दूध ३२ तोले और गोमूत्र १२८ तोले लेवे । इन सबको एकत्र करके खूब खरल करके गोलासा बना लेवे । फिर इसको विधि- पूर्वक मंद मंद अग्निसे पकावे । प्रतिदिन इसमेंसे दो मासे परिमाण सेवन करे तो यह अर्शकुठार रस सब रोगोंको नष्ट करता है ॥५-७॥ चक्राख्य रस । मृतसूताभ्रवैक्रान्तं ताम्रं कांस्यं समं समम् । सर्वतुल्येन गन्धेन दिनं भल्लातकद्रवैः ॥ ८ ॥ मर्दयेद्यत्नतः पश्चाद्वटीं कुर्याद्द्विगुञ्जिकाम् । भक्षणाद्गदजान् हन्ति द्वन्द्वजान्सर्वजानपि ॥ ९ ॥ पारेकी भस्म, अभ्रककी भस्म, वैक्रान्तकी भस्म, तांबेकी भस्म और कांसेकी भस्म यह सब औषधि समान भाग लेवे और सबकी बराबर शुद्ध गंधक लेवे । इन सबको एकत्र भिलावेके रसमें एक दिन तक खरल करे । फिर दो दो रत्तीकी गोली बना लेवे । इन गोलियोंके सेवन करनेसे द्वन्द्वज और सर्वदोषजनित अर्शरोग दूर होता है ॥८॥९॥ नित्योदित रस । मृतसूताभ्रलौहार्कविषं गन्धं समं समम् । सर्वतुल्यन्तु भल्लातफलमेकत्र चूर्णयेत् ॥ १०॥ माषमात्रं लिहेदाज्यै रसश्चार्शांसि नाशयेत् । नित्योदितो रसो नाम गुदोद्भवकुलान्तकः ॥ ११ ॥ पारेकी भस्म, अभ्रककी भस्म, लोहेकी भस्म, तांबेकी भस्म, शुद्ध विष और शुद्ध गंधक यह सब समान भाग लेवे और सबकी बराबर शुद्ध भिलावे लेवे । इन सबको एकत्र पीसकर तीन दिन तक जमींकं- दके रसमें भावना देवे और खरल करे । इसमेंसे प्रतिदिन एक मासे परिमाण औषधि लेकर घृतमें मिलाकर सेवन करनेसे अर्शरोग नष्ट होता है। यह नित्योदित रस बवासीरको जड़से नष्ट करता है॥१०॥११॥

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