भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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रसेन्द्रसारसंग्रह । भाषाटीकासहित । मङ्गलाचरण । रसेन्द्रमिव निःशेष-जरा-व्याधि-विनाशनम् । प्रणमामि गुरु भक्त्या शङ्करं योगसाधनम् ॥ १ ॥ टीकाकारोक्त मङ्गल । प्रणम्य श्रीशिवं भक्त्या यत्र तत्र शिवप्रदम् । करोम्यहं नृवाण्यां वै रसेन्द्रसारसंग्रहम् ॥ १ ॥ क्व चास्ति रससंसिद्धिः क्व चायुर्वेदसागरः । क्व वै रामप्रसादोऽहं भिषक्कीर्त्यभिलाषुकः ॥ २ ॥ यथा तथा गमिष्यामि मन्थानं गुरुदर्शितम् । चक्षुर्युक्तैः सहाऽन्धोपि सुमार्गे गच्छति ध्रुवम् ॥ ३ ॥ दोहा—सर्वत्र हि कल्याणप्रद, गिरिजा सहित महेश । करि प्रणाम उस देवको, सगरे टरत कलेश ॥ १ ॥ रससंग्रह इस ग्रंथको, हिन्दीमें अनुवाद । यथा तथा कछु करत हौं, जडमति रामप्रसाद ॥ २ ॥ कहँ सिद्धी रसराजकी, अरु आयुर्वेद अपार । कहँ चाहत यश महतको, रामप्रसाद सुधार ॥ ३ ॥ अथवा गुरुदर्शितपथा, गमिहौं हौं मतिमन्द । शुभ मग सहजहि जात है, नेत्रवान सँग अन्ध ॥ ४ ॥