रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)
Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary
गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३७८ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । परिमाण औषधियोंको एकत्र त्रिफलेके चूर्णके साथ सेवन करे । यह औषधि पाचक, भेदक तथा आमवात, गुल्म, शूल, उदर, यकृत, प्लीहोदर, अष्ठीला, कामला, पांडु, अरुचि, ग्रन्थिशूल, शिरःशूल, वातरोग, गृध्रसी, गलगण्ड, गण्डमाला, क्रिमि, कुष्ठ, भगन्दर, विद्रधि, अन्त्रवृद्धि, बवासीर और समस्त गुदाके रोगोंको नष्ट करती है। इसको आमवातारी वटिका कहते हैं ॥ १-६ ॥ अपर आमवातारी वटिका । रसगन्धौ वरा वह्निर्गुग्गुलुः क्रमवर्द्धितः । एतदेरण्डतैलेन मर्दयेदतिचिक्कणम् ॥ ७ ॥ कर्षोऽस्यैरण्डतैलेन हन्त्युष्णजलपायिनः । आमवातमतीवोग्रं दुग्धं मौद्गादि वर्जयेत् ॥ ८ ॥ पारा १ भाग, गंधक २ भाग, त्रिफला प्रत्येक तीन भाग, चीतेकी जड़ ४ भाग और गूगल ५ भाग लेवे, इन सब औषधियोंको एकत्र पीसकर एरण्डके तेलमें खरल करके १तोला परिमाण औषधि अण्डीके तेलके साथ सेवन करे और ऊपरसे गरम जलका अनुपान करे तो अत्यन्त उग्र आमवात रोग नष्ट होता है । इस औषधिपर दूध और मूंग आदि भक्षण करना त्याग देवे, इसको आमवातारी वटिका कहते हैं ॥७॥८॥ आमवातेश्वर रस । शुद्धगन्धं पलार्द्धञ्च मृतताम्रञ्च तत्समम् । ताम्रार्द्धं पारदं शुद्धं रसतुल्यं मृतायसम् ॥ ९ ॥ सर्वं पञ्चांगुलेनैव भावयेच्च पुनः पुनः । संचूर्ण्य पञ्चकोलोत्थैः क्वाथैः सर्वं विभावयेत् ॥१०॥ रौद्रे विंशतिवारांश्च गुडूचीनां रसैर्दश । भृष्टटङ्गणचूर्णेन तुल्येन सह मेलयेत् ॥ ११ ॥