भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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पृष्ठ 429

भाषाटीकासहित । ( ४०३ ) काङ्कायन गुटिका । शटीं पुष्करमूलञ्च दन्तीं चित्रकमाढकीम् । शृङ्गवेरं वचाञ्चैव पलिकानि समाहरेत् ॥ २७ ॥ त्रिवृतायाः पलञ्चैकं कुर्यात्त्रीणि च हिंगुनः । यवक्षारात्पले द्वे च द्वे पले चाम्लवेतसात् ॥ २८ ॥ यमान्यजाजीमरिचधान्यकञ्च त्रिकार्षिकम् । उपकुंच्याजमोदाभ्यां पृथगर्द्धपलं भवेत् ॥ २९ ॥ मातुलुङ्गरसेनैव गुटिकां कारयेद्भिषक् । तासामेकां पिबेद्द्वे वा तिस्रो वाथ सुखाम्बुना॥३०॥ अम्लैर्मद्यैश्च यूषैश्च घृतेन पयसाथवा । एषा कांकायनेनोक्ता गुटिका गुल्मनाशिनी ॥ ३१ ॥ अर्शोहृद्रोगशमनी क्रिमीणाञ्च विनाशिनी । गोमूत्रयुक्ता शमयेत्कफगुल्मं चिरोत्थितम् ॥ ३२ ॥ क्षीरेण पित्तरोगञ्च मद्यैरम्लैश्च वातिकम् । त्रिफलारसमूत्रैश्च नियच्छेत्सान्निपातिकम् ॥ रक्तगुल्मेषु नारीणामुष्ट्रीक्षीरेण पाययेत् ॥ ३३ ॥ कचूर, कूठ, दंतीकी जड़, चीतेकी जड़, अरहर, सोंठ, वच और निसोधकी जड़ यह प्रत्येक औषधि एक एक पल लेवे, हींग ३ पल, जवारखार २ पल, अमलवेत २ पल, अजमोद, जीरा, कालीमिरच और धनिया यह प्रत्येक औषधि तीन तीन कर्ष परिणाम लेवे, काला- जीरा और अजवायन यह प्रत्येक औषधि दो दो तोले इन सब औष- धियोंको एकत्र करके बिजौरे नींबूके रसमें खरल करके गोली बना लेवे । इसमेंसे एक या दो अथवा तीन गोली किंचित् गरम जल, कांजी, मदिरा, यूष, घृत अथवा दूधके साथ सेवन करे तो गुल्म,