भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

पृष्ठ 448, कुल 584 में से

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( ४२२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । कस्तूरीमोदक । कस्तूरी वनिता क्षुद्रा त्रिफला जीरकद्वयम् । एलाबीजं त्वचं यष्टिमधुकं मिषि वालकम् ॥ ३६ ॥ शतपुष्पोत्पलं धात्री मुस्तकं भद्रसंज्ञकम् ॥ कदलीनां फलं पक्वं खर्जूरं कृष्णतिल्वकम् ॥ ३७ ॥ कोकिलाख्यस्य बीजञ्च माषमात्रं समं समम् । यावन्त्येतानि चूर्णानि द्विगुणा सितशर्करा ॥ ३८ ॥ धात्रीरसेन पयसा कूष्माण्डस्वरसेन च । विषचेत्पाकविद्वैद्यो मन्दमन्देन वह्निना ॥ ३९ ॥ अवतार्य सुशीते च यथालाभं विनिःक्षिपेत् । अक्षमात्रं प्रयुञ्जीत सर्वमेहप्रशान्तये ॥ ४० ॥ वातिकं पैत्तिकञ्चैव श्लैष्मिकं सान्निपातिकम् । सोमरोगं बहुविधं मूत्रातीसारमुल्बणम् ॥ ४१ ॥ मूत्रकृच्छ्रं निहन्त्याशु मूत्राघातं तथाश्मरीम् । ग्रहणीं पाण्डुरोगञ्च कामलां कुम्भकामलाम् ॥ ४२ ॥ वृष्यो बलकरो हृद्यः शुक्रवृद्धिकरः परः । कस्तूरीमोदकश्चायं चरकेण च भाषितः ॥ ४३ ॥ कस्तूरी, फूलप्रियंगू, कटेरी, हरड़, बहेड़ा, आमला, जीरा, काला जीरा, इलायची, दालचीनी, मुलैठी, सौंफ, सुगन्धवाला, सोयाके बीज, कमल, आमले, नागरमोथा, पकी केलाकी फली, खजूर, काले तिल और तालमखाने यह प्रत्येक औषधि एक एक मासे लेवे और सब औषधियोंसे दुगुनी मिश्री लेवे तथा आमलोंका रस, दूध और भेटेका रस यह तीनों वस्तु सब औषधियोंसे चौगुनी लेवे । इन सब

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