भारतकोश
रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

रसेन्द्रसारसंग्रह (गोपालकृष्ण - पं. रामप्रसाद वैद्य सविस्तार सान्वय हिन्दी टीका सहित)

Rasendra Sara Sangraha of Gopalakrishna with Commentary

गोपालकृष्ण भट्ट (टीकाकार: पं. रामप्रसाद वैद्य) द्वारा

DevanagariHindipublished584 पृष्ठ

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( ७२ ) रसेन्द्रसारसंग्रह । जम्ब्वम्भसा सैन्धवसंयुतेन सगन्धकं स्थापय शुल्वपत्रम् । पक्वायमानं पुटयेत्सुयुक्त्या वातादिकं यावदुपैति शांतिम् ॥ ८४ ॥ दूसरी विधि—सेंधानमक ४ तोले गंधक ४ तोले इन दोनोंको जामु- नके रसमें खरल कर तांबेके बारीक पत्रोंपर लेप करे, इन पत्रोंको एक चौड़े मुखकी हांडीमें रख इन पत्रोंको पतलीसी शरावीसे ढककर सन्धी लेप करे । फिर इस हांडीको बालूरेतसे भर चूल्हे पर चढ़ा बारह घंटेकी तीक्ष्ण अग्नि जलावे फिर स्वांगशीतल होनेपर युक्ति- पूर्वक निकालकर पंचगव्य ( घृत, दूध, दही, गोमूत्र, गोबरका रस ) में रगड़कर शरावसंपुटमें रख तीन पुटें दे तो वमनादि दुर्गुण रहित उत्तम भस्म होजायेगी ॥ ८४ ॥ शुद्धं ताम्रदलं विमर्द्य पटुना क्षारेण जम्बीरजै- नीरैर्घस्रमिदं स्नुगर्कपयसा लिप्तं धमेत्सप्तधा । निर्गुण्ड्यंबुहिमं रसेन्द्रकलितं दुग्धाज्यगन्धेनतत् तुल्येनाथ मृतं भवेत्सपुटितं पञ्चामृतेन त्रिधा८५॥ वांतिभ्रांतिविवर्जितं क्षयरुजाकुष्ठानि पाण्ड्वामयं, शूलं मेहगुदांकुरानिलगदानुक्तानुपानैर्जयेत् । गुञ्जामात्रमिदं ततो द्विगुणितं तच्छुद्धकायेन चेत्, भुक्तं स्थौल्यजरापमृत्युशमनं पथ्याशिनावत्सरात्॥ तीसरी विधि—शुद्ध ताम्र पत्रोंमें सेंधानमक और सुहागा मिलाकर जम्बीरीके रसमें एक दिन मर्दन करे फिर इन पत्रोंपर थोहरका दूध लेप कर अग्निमें तपा संभालूके रसमें बुझावे, ऐसे सात वार थोहरके दूधसे लेप करके बुझावे और सात वार आकका दूध लेप कर अग्निमें तपा संभालूके रसमें बुझावे । इस प्रकार बुझानेसे संभालूके