रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( XII )
वृषभान के गेह दिवारी २५८ वक विलोचन है दुख २०५ बंसी बजावत आनि कठौ २२८ बजी है बजी रसखानि २३२ वन बाग तडागन कु ज गली २३८ बाँक मरोर गई भृकुटीन २८२ वाँकी धरै कलगी सिर २१२ वाँकी वड़ी अखियाँ १८५ वाँकी विलोकनि रगभरी २२६ बाँके कटाछ चितैबो सिख्यो २६२ वागन मे मुरली २६५ वार ही गोरस वेचि री २६४ वागन काहे को जाग्रो ३०१ बात सुनी न कहूँ हरि की २५६ बाल गुलाब के नीर असीर ३०४ वासर तूं जू कहूँ निकरै २८३ विविध सागर रस इंदु ३३५ विरहा की जु आँच लगी ३०३ बिनु गुन जोवन रूप ३२४ विमल सरल रसखानि १५८ विहरै पिय प्यारी सनेह २६८ वेद मूल सब धर्म ३३१ बेनु बजावत आवत है नित २६३ वैद की औषध खाई ३१८ बैन वही उनको गुन १५७ बैरिनि तूँ बरजी न रहै २६२ ब्याही अनब्याही ब्रजमाँही २६५ ब्रज की वनिता सब घरि २३२ ब्रह्म मैं ढूंढ्यो पुरानन गानन १६३ भई बावरी ढूँढ़त काहि २६३