भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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( XI ) दो मन इक होते ३३० द्रौपदी और गनिका गज १७६ नन्द की न दासी हम ३४० नन्द को नन्दन है दुख कंदन २४८ नद महर कै वगर ३५० नाह वियोग वढ्यौ रसखानि १६६ नैन दलालनि चौहटै १८४ नौ लख गाय सुनी ३४२ परम चतुर पुनि रसिकवर ३४२ पहिले दधि लै गई गोकुल २२० प्यारी की चारु सिंगार २८२ प्यारी पै जाई कितो २५४ पीय से तुम मान कर्यौ कत २८७ पूरव पुन्यनि ते चितई २६७ पै एतो हूँ हम ३२६ पै मिठास या मार । ३२६ प्रान वही जु रहै रीझि २३६ प्रीतम नन्दकिसोर १६६ प्रेम अगम अनुपम ३२० प्रेम अयनि श्री राधिका ३२० प्रेम कथानि की बात चलै २८५ प्रेम निकेतन श्री वनहिं ३३४ प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत ३२० प्रेम प्रेम सब कोऊ कहै ३२७ प्रे म फास मै फंसि ३२८ प्रे म वारुनि छानिकै ३२१ प्रे म मरोरि उठै तबहीं २६५ प्र म रूप दर्पण अहो ३२१ प्रे म हरि को रूप है ३२७ फागुन लाग्यो जबते २७४ फूलत फूल सबै वन ३०२