रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( x ) जोहीं मैं तिहारी ओर ३३६ डरै सदा चाहे न कुछ ३२७ डहडही बौरी मजु डार २८८ डोरि लियौ मन मोरि २२७ डोलिवो कु जनि कु जनि को २१४ तट की न घट भरै ३४८ तुम चाहो सो कहौ २४० तू गरवाड कहा भगरै २८६ तू ऐसी चतुराई ठाने ३४३ तेरी गलीन मैं जा दिन तें २६६ तैं न लख्यौ जब १८३ तीरथ भीर मे भूल परी २४८ तोरि मानिनी तैं हियौ ३३४ तौ पहिराइ गई चुरियाँ २६८ तोहू पहिचानौं ३३८ 'ता' जसुदा कहयो धेनु १७७ दपति सुख अरु ३२६ दमकै रवि कु डल दामिनी से १८८ दान पै न कान सुने ३४० दानी नए भए माँगत २२१ दूध दुह्यौ सीरो पर्यौ २२३ दूर ते आड दुरे ही २६० दृग दूने खिंचे रहैं १८५ देखत सेज विछी ही अच्छी २७२ देखन को सखी नैन भए २३६ देखि कै रास महावन को १८८ देखि गदर हित-साहिबी ३३४ देखिहौं आँखिन सो पिय २३६ देख्यौ रूप अपार २१८ देस विदेस के देखे १६८ दोउ कानन कुंडल १६०