रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
पृष्ठ 12, कुल 368 में से
संदर्भ में पढ़ें( IX ) गोरस गाँव ही मैं बिचिबो २६३ ग्वालिन संग जैबौ वन ३१६ ग्यान ध्यान विद्या ३२७ ग्वालिन द्वै क भुजान गहँ २६० घर ही घरु घेरु घनो २५२ चन्दन खोर पै बिन्दु २४३ चन्द सो आनन मैन २२५ चीर की चटक औ लटक ३४७ छूट्यौ गृहराक लोक २४६ छीर जो चाहत चीर गहैं २२२ जाको लसै मुख चन्द समान २८४ जग मे सब जान्यौ ३२५ जग मे सब ते अधिक ३२८ जदपि जसोदा-नद अरु ३३१ जमना तट वीर गई २५० जल की न घट भरै २२४ जात हुती जमुना जल कौ १६४ जाते उपजत प्रेम सोइ ३३३ जाते पलपल बढत ३३३ जा दिन ते निरख्यौ १६४ जा दिन ते वह नन्द को २१० जा दिन ते मुस्कान चुभी २०७ जानै कहा हम मूढ ३१० जाहु न कोई सखी जमुना जल २६७ जेहि पाए वैकुं ठ ३२८ जेहि बिनु जाने कछुहि ३२५ जो कवहूँ मग पाँव न देत २८८ जोग सिखावत आवत है ३१३ जो जाते जार्मे बहुरि ३३३ जो रसना रस न विलसै १५६ जोहन नन्दकुमार को २०६