भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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( VIII )

इक ओर किरीट लसै ३१७ उन्ही के सनेहन सानी २४२ एक ते एक लौ कानन २१६ एक समै इक ग्वालिनि २५७ एक समै जमुना जल-मे २३५ एक सू तीरथ डोलत १७२ एरी कहा वृषभानपुरा की ३३७ एरी चतुर सुजान २६६ एरी तोहूँ पहचानीं ए सजनी जबते ३०८ ए सजनी लोनो लला २०६ ए सजनी मनमोहन नागर १६५ औचक दृष्टि परे कहूँ २५० कंचन के मदिरनि दीठि १७१ कंचन मदिर ऊचे बनाइ १६६ कस के क्रोध की फैलि ३१२ कँस कुढ्यो सुनि वानी १८३ कबहूँ न जा पथ ३२२ कमल ततु सो छीन ३२१ कल काननि कु डल मोरपखा २२६ कहा करै रसखानि को १५८ कहा रसखानि सुख संपति १७० कातिग क्वार के प्रात २०४ कान परे मृदु बैन २५६ कानन दै अंगुरी रहिबो २०८ कान्ह भए बस बाँसुरी के २३१ काम क्रोध मद मोह ३२४ काटे लटै की लटी लुकटी १६०