रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंव्याख्या भाग १६७ प्राप्त कर ले। चाहे कोई किसी भी प्रकार अपना मनोवाञ्छित फल पाले, किन्तु मेरा तो एकमात्र साधन कृष्ण ही है। कृष्ण के अतिरिक्त तीनो लोक चाहे रहे, या नष्ट हो जाये, मुझे इसकी कोई चिन्ता नही है। विशेष—'सेप सुरेस दिनेस गनेस अजैस धनेस महेस' मे छेकानुप्रास और श्रुत्यनुप्रास अलकार है। तुलना—'मेरे तो राधिका नामक ही गति लोक दुऊ रहौ कै नसि जाओ।' —हरिश्चन्द्र सवैया द्रौपदी ग्र ˙ गनिका गज गीध अजामिल सो कियो सो न निहारो। गौतम-गेहिनी कैसी तरी, प्रहलाद को कैसे हरयौ दुख भारो। काहे कौ सोच करै रसखानि कहा करि है रविनन्द विचारो। ता खन जा खन राखियै माखन-चाखनहारो सो राखनहारो ॥१७॥ शब्दार्थ--द्रौपदी=पाडवो की स्त्री। गज=हाथी, जिसकी कृष्ण ने ग्राह से रक्षा की थी। गीध=जटायु, जो सीता की रक्षा करते समय रावण के बाणो से घायल हुआ था और अन्त मे राम ने जिसका उद्धार किया था। अजामिल=एक व्यक्ति का नाम। गौतम-गेहनी=गौतम की स्त्री अहिल्याबाई। रवि नन्द=यमराज। ताखन=उस समय। जा खन=जिस समय। माखन- चाखनहारो=श्रीकृष्ण। राखनहारो=रक्षक। अर्थ—जब कृष्ण रक्षक है तो मनुष्य को किसी भी प्रकार की चिन्ता नही करनी चाहिए, इस भाव को व्यक्त करते हुए रसखान कहते है कि कृष्ण इतने दयालु है कि अपने भक्तो की टेर सुनते ही तुरन्त उनकी रक्षा के लिए कटि- बद्ध हो जाते है। द्रौपदी, गणिका, गज, गीध और अजामिल ने अपने जीवन मे क्या कार्य किये थे, क्या उनके कार्य उनका उद्धार करने मे समर्थ थे ? इन बातो पर कृष्ण ने कोई ध्यान नही दिया और तुरन्त उनका उद्धार कर दिया। इसी प्रकार गौतम—स्त्री अहिल्याबाई को भी मुक्ति प्रदान की तथा हिरण्य- कशिपु को मारकर प्रह्लाद के भारी दुख का हरण किया। अत हे मनुष्य ! जिस समय श्रीकृष्ण तुम्हारे रक्षक है, उस समय तुम्हे कोई चिन्ता नही करनी