रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ
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व्याख्या भाग ३१६ चारो ओर बिखर कर लटक रही है। उनके गले मे पड़ा हुआ सर्प साधु-वस्त्र के समान दिखाई दे रहा है। रसखान कहते है कि जो मन लगाकर शिव की इस मूर्ति को देखते है, शिव उनके दुखो को नष्ट करते है। वे गज की खाल ओढ़े, कपालो की माला पहने हुए गाल बजाते हुए आते है।