रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ रसखान-ग्रन्थावली प्रेम ठोस भौतिक था, किन्तु बाद मे वह ईश्वर-प्रेम मे परिणत हो गया और कृष्ण-भक्त कवियो मे रसखान का विशिष्ट स्थान है। जन्म-स्थान रसखान के जन्म-स्थान के विषय मे भी दो मत मिलते है। 'शिवसिंह- सरोज' मे इन्हे जिला हरदोई के पिहानी जन्म-स्थान का बताया गया है और इन्होने 'प्रेम-वाटिका' मे अपना जन्म-स्थान दिल्ली बताया है— 'देखि गदर हित साहिबी, दिल्ली-नगर मसान। छिनहि बादसा वस की, ठसक छेदि रसखान ॥' अब यह देखना है कि इनमे कौन सा मत सगत है। डॉ० याज्ञिक शिवसिंह-सरोजकार के मत को असगत मानते हुए लिखते है कि पिहानी की वस्ती को हुमायूॅ-अकबर ने संवत् १६१२ के बाद बसाया था। इस कारण रसखान के जन्म के समय पिहानी का कोई अस्तित्व ही नही था। हां, रसखान का शिष्य कादिरबख्श वहाँ रहा हो, इसकी सभावना हो सकती है और यह भी सभावना हो सकती है कि भूल से शिष्य के निवास-स्थान को ही गुरु का जन्म-स्थान समझ लिया हो। जहाँ तक दिल्ली का सम्बध है, रसखान ने दिल्ली को अपना निवास- स्थान अवश्य बताया है, पर उसे जन्म-स्थान नही बताया। अत निर्विवाद रूप से यह भी तो नही कहा जा सकता कि दिल्ली ही इनका जन्म-स्थान है, किन्तु रसखान के जीवन पर दृष्टिपात करने से यह ज्ञात होता है कि इनका भक्त-पूर्व जीवन दिल्ली मे ही बीता। इसलिए यह संभावना की जा सकती है कि इनका जन्म भी दिल्ली मे ही हुआ होगा। निष्कर्ष अब तक के विवेचन का निष्कर्ष यह है कि रसखान का जन्म संवत् १५६० के लगभग दिल्ली मे हुआ। इनका सम्बन्ध तत्कालीन शाही वंश मे था, किन्तु जब शाही वश का पतन हुआ और दिल्ली उजड गई तो ये संवत् १६१२ के लगभग दिल्ली को छोडकर ब्रज मे आ गये और वहाँ कृष्ण-भक्ति मे तल्लीन रहने लगे। कहते है, कि प्रारंभ मे इनका प्रेम ठोस भौतिक था, अर्थात् ये एक साहू- कार के लडके पर आसक्त थे, पर सयोग मे इनके मन को ठेस लगी और इनका