रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)
Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary
रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५४ रसखान-ग्रन्थावली
इस दृष्टि से विचार करने पर यह निष्कर्ष निकालना कठिन नही कि प्रस्तुत दानलीला मे निहित भाव रसखान के ही है ओर भाषा का परिवर्तन इनके भक्तो की देन है । दानलीला में राधा और कृष्ण का संवाद है, ठीक वैसा ही जैसा सूरदास ओर घनानन्द मे मिलता है । राधा दधि मॉगने पर कृष्ण की भर्त्सना करती है ओर कृष्ण भी उस भर्त्सना का वैसे ही शब्दो मे उत्तर देते है । स्फुट पद— स्फुट पदो के अन्तर्गत पाँच पद संग्रहीत है । प्रथम पद मे कृष्ण ओर गोपी का संवाद है । मार्ग मे जाती हुई किसी गोपी को कृष्ण छेड़ देते है । इस पर वह चिढ जाती है ओर कृष्ण को भला-बुरा कहने लगती है । इसी बात पर दोनो मे वाद-विवाद प्रारभ हो जाता है । यह वाद-विवाद इस प्रकार है— कृष्ण—यदि तू अपने मन मे इतनी होशियार बनती तो इस रास्ते से निक- लती ही क्यो है ? गोपी—यह रास्ता तेरे बाबा का नही है । और न पहले-पहल ही इस रास्ते से जा रही हूँ । पहले भी इस रास्ते से गई थी, तब किसी ने कुछ नही कहा । यह रास्ता तो सभी के चलने के लिए है । अतः तुम हमारा रास्ता क्यो रोकते हो ? हमे छोडकर या तो सीधे-सीधे यहाँ से चले जाओ, अन्यथा हम तुम्हारी शिकायत तुम्हारे पिता नन्द मिहिर से कर देगी । दूसरे पद मे भी गोपी द्वारा कृष्ण की भर्त्सना का वर्णन है । गोपी की फटकारे सुनकर कृष्ण को क्रोध आ जाता है ओर वे उसके सिर से दही की मटकी उतार कर पृथ्वी पर फेक देते है । मटकी फूट जाती है, दही नालियो मे बहने लगती है । तब विवश होकर गोपी उनसे दूसरे दिन मिलने का वचन देती है । तीसरे पद मे फाग का वर्णन है । कोई गोपी अपनी सखी को कृष्ण के साथ फाग खेलने के लिए प्रेरित करती है । चौथे पद मे भी फाग का वर्णन है । कोई गोपी कृष्ण को फाग खेलने के लिए घर से बाहर निकलने के लिए ललकारती है और जब कृष्ण बाहर आ जाते है तो उनसे बिजली की तरह लिपट जाती है ।