भारतकोश
रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

रसखान रचनावली (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका एवं दानलीला सटीक)

Raskhan Rachanavali with Hindi Commentary

रसखान (सैयद इब्राहिम) / पं. विद्यानिवास मिश्र द्वारा

DevanagariBrajpublished368 पृष्ठ

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( VI ) अधर लगाई रस प्याइ । २६८ अवहिं खरिक गई गाइ के २०० अरपी श्रीहरि चरन ३३५ अरी अनोखी बाम २६८ अलबेली विलोकनि बोलनि १८४ अली पगे रंगे २४४ आइ सबै व्रज गोप लली २४५ आई खेलि होरी व्रज २७४ आई हौ आज नई ३३६ आज अचानक राधिका ३०० आजु बरसाने बरसाने २६६ आज गई व्रजराज के २०२ आज भटू मुरली-वट के २७० आज महूँ दधि वेचन २२० आज होरी रे मोहन ३४४ आजू गई हुती भोर ही १७८ आजु भटू इक गोप कुमार २७० आजु भटू इक गोप वधू २३० आजु री नदलला निकस्यौ २६७ आजु सवारति नेकु भटू २८२ आजु सखी नदनंदन री १०८ आनंद अनुभव होत ३२३ आपनो सो ढोटा हम २३३ आये कहा करिकै ३०५ आयो हुतौ नियरे रसखानि २११ आली लला घन सो २०१ आवत लाल गुलाल लिए २७६ आवत है वन ते मनमोहन १८१ आवत हौ रस के चसके ३३६ इक अगौ विनु कारनहिं ३२६