रत्नावली नाटिका (सम्राट हर्षवर्धन - शास्त्रीय नाटिका रत्न सम्पूर्ण ४ अङ्क सान्वय सटीक)
Ratnavali Natika of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
पृष्ठ 180, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयोऽङ्कः 135 हतबलाः इत्यर्थः। इत इत्यनेन निवृत्त इत्यर्थे गृहीते तेषां पातालगमनस्याभावत्वात्। पूर्व्वं पुरा ये लक्ष्मणवीरवानरभटाः लक्ष्मणश्च रामानुजः वीरवानरभटाश्च वानरसैनिकाः मेघनादा- हताः मेघनादेन रावणपुत्रेण आहताः अभवन् इत्यर्थः। तेऽपि गुणनिधेः अतुलगुणसम्पन्नस्य महौषधेः विशल्यकरणादेः हनुमता आनीतस्य इत्यर्थः, गन्धं पीत्वा आघ्राय पुनर्जीविताः अभवन्। एवं मणिमन्त्रौषधीनामतुल्यः प्रभावः ॥५॥ साटोपम् सगर्व्वम्। ससम्भ्रमम् सभयम् सत्वरं च। ईदृशानां भूतादीनामित्यर्थः। स्फुटाक्षरमिति। स्फुटाक्षरम् स्फुटाक्षरं इटं भाषितम् इत्यर्थः। मधुरं श्रवणसुखम् स्त्रीस्वभावतः स्त्रीत्वात् कण्ठमाधुर्य्यमित्यर्थः। अल्पाङ्गत्वत् ह्रस्वदेहत्वात् अनिर्क्रादि अनुच्चैः आकण्य्यमानम् यस्मात् तस्मात् सा सारिका इति मन्ये तर्कयामि ॥६॥ पिशुनजनहृदयकुटिलेन पिशुनाः दुर्ज्जनाः खलाः तेषां हृदयमिव कुटिलं दण्डकाष्ठमित्यर्थः। Prose order. समरे श्रीपुरुषोत्तमस्य कण्ठे मणिं दृष्ट्वा शत्रभिः नष्टम्। मन्त्रवरैः भुजङ्गाः हताः वसुधामूले वसन्ति। पूर्व्वं ये लक्ष्मणवीरवानरभटाः मेघनादाहताः तेऽपि गुणनिधेः महौषधेः गन्धं पीत्वा पुनः जीविताः (अभवन्) ॥५॥ यस्मात् इदम् स्फुटाक्षरं स्त्रीस्वभावतः मधुरम् अल्पाङ्गत्वत् अनिर्क्रादि, (तस्मात्) (अहं) मन्ये सा सारिका वदति (इति) ॥६॥ Beng. Trans. রাজা—বয়স্য, তাহাতে আর সন্দেহ কি? মণি, মন্ত্র ও ঔষধের প্রভাব চিন্তারও অগোচর; দেখ— পুরুষোত্তম বিষ্ণুর কণ্ঠে মণি দেখিয়া যুদ্ধে শত্রুগণ বিনাশপ্রাপ্ত হইয়াছিল। শ্রেষ্ঠ মন্ত্র- সমূহের দ্বারা ভুজঙ্গগণ হতবীর্য্য হইয়া পাতালে বাস করিতেছে। পুরাকালে লক্ষ্মণ ও অন্যান্য যে সমস্ত বানরসৈনিক মেঘনাদকর্ত্তৃক আহত হইয়াছিল তাহারাও গুণের আকর মহৌষধির গন্ধ আঘ্রাণ করিয়া পুনর্ব্বার জীবিত হইল ॥৫॥ অতএব, পথ দেখাও, যাহাতে আমরা আজ উহা দর্শন করিয়া চক্ষুর ফল (সাফল্য) অনুভব করি। বসন্তক—(সগর্ব্বে) আসুন আসুন আপনি। রাজা—অগ্রসর হও। (উভয়ে সগর্ব্বে পরিক্রমণ করিতে লাগিলেন) বসন্তক—(শুনিয়া সভয়ে রাজার দিকে ফিরিল ও রাজার হস্ত ধারণ করিয়া সসম্ভ্রমে) হে বয়স্য, আসুন, পলায়ন করি।