ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)
Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi
महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा
स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सर्वभेदविवर्जितम् । सच्चिदानन्दं ब्रह्मैव नानाकारमिव स्थितम् ॥ 33.29॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं कर्ता चावसरोऽस्ति हि । सच्चिदानन्दं ब्रह्मैव परं ज्योतिः स्वरूपकम् ॥ 33.30॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं नित्यनिश्चलमव्ययम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं वाचावधिरसावयम् ॥ 33.31॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं स्वयमेव स्वयं सदा । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं न करोति न तिष्ठति ॥ 33.32॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं न गच्छति न तिष्ठति । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं ब्रह्मणोऽन्यन्न किञ्चन ॥ 33.33॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं न शुक्लं न च कृष्णकम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सर्वाधिष्ठानमव्ययम् ॥ 33.34॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं न तूष्णीं न विभाषणम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सत्यं नाहं न किञ्चन ॥ 33.35॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं परात्परमनुद्भवम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं तत्त्वातीतं महोत्स्वम् ॥ 33.36॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं परमाकाशमाततम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सर्वदा गुरुरूपकम् ॥ 33.37॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सदा निर्मलविग्रहम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं शुद्धचैतन्यमाततम् ॥ 33.38॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं स्वप्रकाशात्मरूपकम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं निश्चयं चात्मकारणम् ॥ 33.39॥
ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं स्वयमेव प्रकाशते । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं नानाकार इति स्थितम् ॥ 33.40॥
ब्रह्मैव सच्चिदाकारं भ्रान्ताधिष्ठानरूपकम् । ब्रह्मैव सच्चिदानन्दं सर्वं नास्ति न मे स्थितम् ॥ 33.41॥
वाचामगोचरं ब्रह्म सच्चिदानन्दविग्रहम् । सच्चिदानन्दरूपोऽहमनुत्पन्नमिदं जगत् ॥ 33.42॥
ब्रह्मैवेदं सदा सत्यं नित्यमुक्तं निरञ्जनम् । सच्चिदानन्दं ब्रह्मैव एकमेव सदा सुखम् ॥ 33.43॥