ऋभु गीता (शिव रहस्य - निदिध्यासन व अद्वैत बोध)
Ribhu Gita of Shiva Rahasya Hindi
महर्षि ऋभु / महर्षि निदाघ द्वारा
स्रोत: Ribhu Gita Sanskrit Shlokas with Commentary (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें॥ सप्तमोऽध्यायः ॥
ऋभुः -
अत्यद्भुतं प्रवक्ष्यामि सर्वलोकेषु दुर्लभं । वेदशास्त्रमहासारं दुर्लभं दुर्लभं सदा ॥ 7.1॥
अखण्डैकरसो मन्त्रमखण्डैकरसं फलं । अखण्डैकरसो जीव अखण्डैकरसा क्रिया ॥ 7.2॥
अखण्डैकरसा भूमिरखण्डैकरसं जलं । अखण्डैकरसो गन्ध अखण्डैकरसं वियत् ॥ 7.3॥
अखण्डैकरसं शास्त्रं अखण्डैकरसं श्रुतिः । अखण्डैकरसं ब्रह्म अखण्डैकरसं व्रतं ॥ 7.4॥
अखण्डैकरसो विष्णुरखण्डैकरसः शिवः । अखण्डैकरसो ब्रह्मो अखण्डैकरसाः सुराः ॥ 7.5॥
अखण्डैकरसं सर्वमखण्डैकरसः स्वयं । अखण्डैकरसश्चात्मा अखण्डैकरसो गुरुः ॥ 7.6॥
अखण्डैकरसं वाच्यमखण्डैकरसं महः । अखण्डैकरसं देह अखण्डैकरसं मनः ॥ 7.7॥
अखण्डैकरसं चित्तं अखण्डैकरसं सुखं । अखण्डैकरसा विद्या अखण्डैकरसोऽव्ययः ॥ 7.8॥
अखण्डैकरसं नित्यमखण्डैकरसः परः । अखण्डैकरसात् किंचिदखण्डैकरसादहं ॥ 7.9॥
अखण्डैकरसं वास्ति अखण्डैकरसं न हि । अखण्डैकरसादन्यत् अखण्डैकरसात् परः ॥ 7.10॥
अखण्डैकरसात् स्थूलं अखण्डैकरसं जनः । अखण्डैकरसं सूक्ष्ममखण्डैकरसं द्वयं ॥ 7.11॥
अखण्डैकरसं नास्ति अखण्डैकरसं बलं । अखण्डैकरसाद्विष्णुरखण्डैकरसादणुः ॥ 7.12॥
अखण्डैकरसं नास्ति अखण्डैकरसाद्भवान् । अखण्डैकरसो ह्येव अखण्डैकरसादितं ॥ 7.13॥