ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1034, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयस्य शर्मन्नुप विश्वे जनास एवैस्तस्थुः सुमतिं भिक्षमाणाः. वैश्वानरो वरमा रोदस्योरग्निः ससाद पित्रोरुपस्थम्.. (६) सभी मनुष्य सुखप्राप्ति के निमित्त जिस वैश्वानर अग्नि की कृपा की प्रार्थना करते हुए हव्यों एवं कर्मों के साथ उपस्थित होते हैं, वे ही अपने माता-पिता के समान स्वर्ग और धरती के बीच में उपस्थित अंतरिक्ष में आए थे. (६) आ देवो ददे बुध्या३ वसूनि वैश्वानर उदिता सूर्यस्य. आ समुद्रादवरादा परस्मादग्निर्देदे दिव आ पृथिव्याः.. (७) सूर्य निकल आने पर वैश्वानर अग्नि अंतरिक्ष के अंधकार को ले लेते हैं. वे अंतरिक्ष, धरती एवं स्वर्ग से भी अंधकार ले लेते हैं. (७) सूक्त—७ देवता—अग्नि प्र वो देवं चित् सहसानमग्निमश्वं न वाजिनं हिषे नमोभिः. भवा नो दूतो अध्वरस्य विद्वान्त्मना देवेषु विविदे मितद्रुः.. (१) हे राक्षसों को हराने वाले तथा अश्व के समान वेगशाली अग्नि देव! हम हव्य द्वारा तुम्हें यज्ञ का दूत बनाते हैं. हे विद्वान् अग्नि! तुम देवों में वृक्ष जलाने वाले के नाम से प्रसिद्ध हो. (१) आ याह्यग्ने पथ्या३अनु स्वा मन्द्रो देवानां सख्यं जुषाणः. आ सानु शुष्मैर्नदयन्पृथिव्या जम्भेभिर्विश्वमुशधग्वनानि.. (२) हे प्रसन्न करने वाले अग्नि! तुम देवों के साथ मित्रता का आचरण करते हुए अपने तेजों द्वारा धरती पर ऊंचे लताकुंजों को शब्दपूर्ण करो तथा अपने ज्वालारूपी दांतों से वनों को जलाते हुए अपने मार्ग से आओ. (२) प्राचीनो यज्ञः सुधितं हि बर्हिः प्रीणीते अग्निरीळितो न होता. आ मातरा विश्ववारे हुवानो यतो यविष्ठ जज्ञिषे सुशेवः.. (३) हे अतिशय युवा अग्नि! जब तुम शोभन सुखपूर्वक जन्म लेते हो, तब यज्ञ का भली प्रकार अनुष्ठान किया जाता है एवं कुश बिछाए जाते हैं. स्तुति सुनकर अग्नि और होता तृप्त होते हैं. सबके प्रिय धरती आकाश भी बुलाए जाते हैं. (३) सद्यो अध्वरे रथिरं जनन्त मानुषासो विचेतसो य एषाम्. विशामधायि विशपतिर्दुरोणे३ग्निर्मन्द्रो मधुवचा ऋतावा.. (४) विशेष विद्वान् लोग यज्ञ में नेता अग्नि को तुरंत उत्पन्न करते हैं. यज्ञकर्त्ताओं का हव्य ebook converter DEMO Watermarks*