भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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वहन करने वाले, विश्वपति, प्रसन्नकर्त्ता, मधुर वचन वाले एवं यज्ञयुक्त अग्नि मनुष्यों के घर में स्थापित होते हैं. (४) असादि वृतो वह्निराजगन्वानग्निर्ब्रह्मा नृषदने विधर्ता. द्यौश्च यं पृथिवी वावृधाते आ यं होता यजति विश्ववारम्.. (५) होतारूप से हव्य ढोने वाले, ब्रह्मा, सबको धारण करने वाले एवं स्वर्गलोक से आए हुए वे अग्नि मानवों के घरों में बैठे हैं, जिन्हें स्वर्ग व धरती बढ़ाते हैं और होता जिन सर्वप्रिय अग्नि का यज्ञ करता है. (५) एते द्युम्नेभिर्विश्वमातिरन्त मन्त्रं ये वारं नर्या अतक्षन्. प्र ये विशस्तिरन्त श्रोषमाणा आ ये मे अस्य दीधयन्नृतस्य.. (६) वे लोग अन्नों द्वारा विश्व को पालते हैं, जिन्होंने स्तुतियोग्य मंत्रों का पर्याप्त संस्कार किया है, जिन लोगों ने सुनने की इच्छा से अग्नि को बढ़ाया है एवं सत्यभूत अग्नि को जलाया है. (६) नू त्वामग्न ईमहे वसिष्ठा ईशानं सूनो सहसो वसूनाम्. इषं स्तोतृभ्यो मघवद्भ्य आनड्युयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) हे बलपुत्र एवं वसुओं के स्वामी अग्नि! वसिष्ठगोत्रीय ऋषियों को जो तुम्हारे स्तोता एवं हवियुक्त हैं. तुम अन्न द्वारा शीघ्र प्राप्त करो एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी रक्षा करो. (७) सूक्त—८ देवता—अग्नि इन्धे राजा समर्यो नमोभिर्यस्य प्रतीकमाहुतं घृतेन. नरो हव्येभिरीळते सबाध अग्निरग्र उषासामशोचि.. (१) दीप्त एवं हवि के स्वामी अग्नि स्तुतियों के साथ प्रज्वलित होते हैं. उनका रूप घृत द्वारा बुलाया जाता है एवं नेता जन एकत्र हव्य के साथ उनकी स्तुति करते हैं. अग्नि उषा के आगे भली प्रकार जलते हैं. (१) अयमु ष्य सुमहाँ अवेदि होता मन्द्रो मनुषो यह्वो अग्निः. वि भा अकः ससृजानः पृथिव्यां कृष्णपविरोषधीभिर्ववक्षे.. (२) देवों को खुलाने वाले, प्रसन्नताकारक एवं महान् अग्नि मानवों द्वारा विशाल जाने जाते हैं एवं प्रकाश फैलाते हैं. काले मार्ग वाले अग्नि धरती पर उत्पन्न होकर ओषधियों की सहायता से बढ़ते हैं. (२) कया नो अग्ने वि वसः सुवृक्तिं कामु स्वधामृणवः शस्यमानः. ebook converter DEMO Watermarks*