ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1042, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसेमां वेतु वषट्कृतिमग्निर्जुषत नो गिरः. यजिष्ठो हव्यवाहनः.. (६) अतिशय यज्ञपात्र एवं हव्य वहन करने वाले अग्नि हमारे हव्य और स्तुतियों को स्वीकार करें. (६) नि त्वा नक्ष्य विशपते द्युमन्तं देव धीमहि. सुवीरमग्न आहुत.. (७) हे समीप जाने योग्य, प्रजाओं के स्वामी, सब यजमानों द्वारा बुलाए गए, दीप्तिशाली एवं कल्याणकारी स्तोत्रों वाले अग्नि देव! हमने तुम्हें स्थापित किया है. (७) क्षप उस्रश्च दीदिहि स्वग्नयस्त्वया वयम्. सुवीरस्त्वमस्मयुः.. (८) हे अग्नि! तुम दिन-रात प्रज्वलित रहो. तुम्हारे कारण हम शोभन अग्नियों वाले हैं. तुम हमारी कामना करते हुए कल्याणकारी स्तोत्रों वाले बनो. (८) उप त्वा सातये नरो विप्रासो यन्ति धीतिभिः. उपाक्षरा सहस्रिणी.. (९) हे अग्नि! मेधावी यजमान यज्ञकर्मों द्वारा धन पाने के लिए तुम्हारे पास जाते हैं. हमारी हजार अक्षरों वाली एवं नाशरहित स्तुति तुम्हें प्राप्त हो. (९) अग्नी रक्षांसि सेधति शुक्रशोचिरमर्त्यः. शुचिः पावक ईड्यः.. (१०) शुभ्र ज्वाला वाले, मरणरहित, शुद्ध, पवित्रकर्त्ता एवं स्तुतियोग्य अग्नि राक्षसों को बाधा पहुंचावें. (१०) स नो राधांस्या भरेशानः सहसो यहो. भगश्च दातु वार्यम्.. (११) हे बल के पुत्र एवं सकल जगत् के स्वामी अग्नि! हमें धन दो. भगदेव भी हमें धन दें. (११) त्वमग्ने वीरवद्यशो देवश्च सविता भगः. दितिश्च दाति वार्यम्.. (१२) हे अग्नि! तुम हमें संतानयुक्त धन दो. सविता देव, भग और अदिति भी हमें धन दें. (१२) अग्ने रक्षा णो अंहसः प्रतिष्म देव रीषतः. तपिष्ठैरजरो दह.. (१३) हे अग्नि! हमें पाप से बचाओ. हे जरारहित अग्नि देव! तुम अपने अतिशय तापदायक तेजों द्वारा शत्रुओं को जलाओ. (१३) ebook converter DEMO Watermarks*