भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1043, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1043

अधा मही न आयस्यनाधृष्टो नृपीतये. पूर्भवा शतभुजि:.. (१४) हे अपराजित अग्नि! तुम इस समय हमारे मनुष्यों की रक्षा के लिए लौह से बनी विस्तृत नगरी बनाओ. (१४) त्वं नः पाह्यंहसो दोषावस्तरघायतः. दिवा नक्तमदाभ्य.. (१५) हे अपराजेय एवं अंधकार को नष्ट करने वाले अग्नि! तुम पाप और शत्रु से हमारी रात- दिन रक्षा करो. (१५) सूक्त—१६ देवता—अग्नि एना वो अग्निं नमसोजों नपातमा हुवे. प्रियं चेतिष्ठमरतिं स्वध्वरं विश्वस्य दूतममृतम्.. (१) हे यजमान! मैं शक्तिपुत्र, प्रिय, अतिशय ज्ञानशील, गतिशील, शोभनयज्ञ वाले, सबके दूत और मरणरहित अग्नि को इस स्तुति द्वारा तुम्हारे कल्याण के लिए बुलाता हूं. (१) स योजते अरुषा विश्वभोजसा स दुद्रवत्स्वाहुतः. सुब्रह्मा यज्ञः सुशमी वसूनां देवे राधो जनानाम्.. (२) प्रकाशयुक्त एवं सबके पालक अग्नि अपने रथ में घोड़ों को जोतते हैं एवं शीघ्रता से देवों के पास जाते हैं. हे भली प्रकार बुलाए गए एवं शोभनस्तुति वाले अग्नि! तुम यज्ञरूप एवं शोभनकर्म वाले हो. वसिष्ठगोत्रीय ऋषि का हवि अग्नि के पास जाए. (२) उदस्य शोचिरस्थादाजुह्वानस्य मीळहुषः. उद्भूमासो अरुषासो दिविस्पृशः समग्निमिन्धते नरः.. (३) बुलाए गए एवं अभिलाषापूरक अग्नि का तेज ऊपर उठता है. शोभन एवं आकाश को छूने वाले धुएं उठ रहे हैं. लोग अग्नि को प्रज्वलित कर रहे हैं. (३) तं त्वा दूतं कृण्महे यशस्तमं देवाँ आ वीतये वह. विश्वा सूनो सहसो मर्तभोजना रास्व तद्यत्त्वेमहे.. (४) हे बलपुत्र एवं अतिशय यश वाले अग्नि! हम तुम्हें दूत बनाते हैं. तुम हव्य भक्षण के लिए देवों को बुलाओ. जब हम तुम्हारी याचना करते हैं, तभी हमें मानवों का भोग दो. (४) त्वमग्ने गृहपतिस्त्वं होता नो अध्वरे. त्वं पोता विश्ववार प्रचेता यक्षि वेषि च वार्यम्.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*