भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1045, कुल 1855 में से

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सोमरस से पात्र भरो और सोमरस का दान करो. इसके बाद अग्नि देव तुम्हें धारण करेंगे. (११) तं होतारमध्वरस्य प्रचेतसं वह्निं देवा अकृण्वत. दधाति रत्नं विधते सुवीर्यमग्निर्जनाय दाशुषे.. (१२) देवों ने उत्तम बुद्धि अग्नि को यज्ञ वहन करने वाला एवं बुलाने वाला बनाया है. अग्नि सेवा करने वाले एवं हव्य देने वाले व्यक्ति को शोभन वीर्य वाला धन दें. (१२) सूक्त—१७ देवता—अग्नि अग्ने भव सुषमिधा समिद्ध उत बर्हिरुर्विया वि स्तृणीताम्.. (१) हे अग्नि! तुम शोभन-समिधाओं द्वारा प्रज्वलित बनो. अध्वर्यु कुश फैलावें. (१) उत द्वार उशतीर्वि श्रयन्तामुत देवाँ उशत आ वहेह.. (२) हे अग्नि! देवों की कामना करने वाले यज्ञशालाद्वारों का आश्रय लो एवं यज्ञ की कामना करने वाले देवों को इस यज्ञ में लाओ. (२) अग्ने वीहि हविषा यक्षि देवान्त्स्वध्वरा कृणुहि जातवेदः.. (३) हे जातवेद अग्नि! तुम देवों के सामने जाओ, हवि द्वारा देवों का यज्ञ करो और उन्हें शोभनयज्ञ वाला बनाओ. (३) स्वध्वरा करति जातवेदा यक्षद्देवाँ अमृतान्यिप्रयच्च.. (४) हे जातवेद अग्नि! तुम मरणरहित देवों को शोभनयज्ञ वाला करो, हवि से उनका यज्ञ करो और उन्हें स्तोत्रों से प्रसन्न करो. (४) वंस्व विश्वा वार्याणि प्रचेतः सत्या भवन्त्वाशिषो नो अद्य.. (५) हे विशिष्ट बुद्धि वाले अग्नि! हमें सब संपत्तियां दो. हमारे आशीर्वाद आज सच्चे हों. (५) त्वामु ते दधिरे हव्यवाहं देवासो अग्न ऊर्जा आ नपातम्.. (६) हे बलपुत्र अग्नि! तुम्हें उन्हीं देवों ने हव्य वहन करने वाला बनाया है. (६) ते ते देवाय दाशतः स्याम महो नो रत्ना वि दध इयानः.. (७) हे दीप्तिशाली अग्नि! हम हव्यदाताओं को याचना करने पर महान् धन दो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*

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