भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1046, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1046

सूक्त—१८ देवता—इंद्र व सुदास त्वे ह यत्पितरश्चिन्न इन्द्र विश्वा वामा जरितारो असन्वन्. त्वे गावः सुदुघास्त्वे ह्यश्वास्त्वं वसु देवयते वनिष्ठः.. (१) हे इंद्र! हमारे पितरों ने तुम्हारा स्तुतिकर्त्ता बनकर समस्त उत्तम धनों को प्राप्त किया था. तुम्हारी गाएं सरलता से दुही जाने वाली हैं एवं तुम अश्वों के स्वामी हो. तुम देवों के अभिलाषियों को अधिक देते हो. (१) राजेव हि जनिभिः क्षेष्येवाव द्युभिरभि विदुष्कविः सन्. पिशा गिरो मघवन् गोभिरश्वैस्त्वायतः शिशीहि राये अस्मान्.. (२) हे इंद्र! तुम अपनी पत्नियों के साथ राजा के समान शोभा पाते हो. हे विद्वान् एवं कवि इंद्र! स्तोताओं को स्वर्ण आदि धन, गायों एवं अश्वों से सभी प्रकार संपन्न बनाओ. हम तुम्हारे अभिलाषी हैं. तुम धनप्राप्ति के लिए हमारा संस्कार करो. (२) इमा उ त्वा पस्पृधानासो अत्र मन्द्रा गिरो देवयन्तीरुप स्थुः. अर्वाची ते पथ्या राय एतु स्याम ते सुमताविन्द्र शर्मन्.. (३) हे इंद्र! इस यज्ञ में परस्पर स्पर्धा करती हुई एवं प्रसन्न करने वाली स्तुतियां तुम्हारे पास जाती हैं. तुम्हारे धन का मार्ग हमारी ओर हो. तुम्हारी कृपा से हम सुखी हों. (३) धेनुं न त्वा सूयवसे दुदुक्षन्नुप ब्रह्माणि ससृजे वसिष्ठः. त्वामिन्मे गोपतिं विश्व आहा न इन्द्रः सुमतिं गन्तवच्छ.. (४) हे इंद्र! जिस प्रकार उत्तम घास वाली गोशाला में गाय को दुहा जाता है, उसी प्रकार तुम्हें दुहने की इच्छा से वसिष्ठ ने स्तोत्ररूपी बछड़ा बनाया है. संसारभर तुम्हें ही गायों का स्वामी कहता है. तुम हमारी शोभनस्तुति के समीप आओ. (४) अर्णांसि चित्प्रथना सुदास इन्द्रो गाधान्यकृणोत्सुपारा. शर्धन्तं शिम्युमुचथस्य नव्यः शापं सिन्धूनामकृणोदशस्तीः.. (५) हे स्तुतियोग्य इंद्र! तुमने सुदास राजा के लिए परुष्णी नदी की भयानक धारा को भी उथला और सरलता से पार करने योग्य बनाया था. तुमने स्तोता के प्रति उस शाप को नष्ट किया था, जो नदियों में बाढ़ लाता है एवं उनका प्रवाह रोकता है. (५) पुरोळा इत्तुर्वशो यक्षुरासीद्राये मत्यासो निशिता अपीव. श्रुष्टिं चक्रुर्भृगवो द्रुह्यवश्च सखा सखायमतरद्विषूचोः.. (६) तुर्वश नाम के एक यज्ञकुशल एवं अग्रगामी राजा थे. जल में मछली के समान नियंत्रित ebook converter DEMO Watermarks*