ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1057, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतुम्हारी शक्ति और धन को कौन नहीं समझेगा. (८) ये च पूर्व ऋषयो ये च नूतना इन्द्र ब्रह्माणि जनयन्त विप्राः. अस्मे ते सन्तु सख्या शिवानि यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (९) हे इंद्र! सभी प्राचीन एवं नवीन ऋषि तुम्हारे लिए स्तोत्र बनाते हैं. तुम्हारी मित्रता हमारे लिए मंगलकारी हो. तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (९) सूक्त—२३ देवता—इंद्र उदु ब्रह्माण्याैरत श्रवस्येन्द्रं समर्ये महया वसिष्ठ. आ यो विश्वानि शवसा ततानोपश्रोता म ईवतो वचांसि.. (१) ऋषियों ने सब स्तुतियां अन्न पाने की अभिलाषा से कही हैं. हे वसिष्ठ! तुम भी स्तोत्र व हव्य द्वारा इंद्र की पूजा करो. जिस इंद्र ने अपनी शक्ति से समस्त लोकों को विस्तृत किया है, वे मुझ समीपगामी की स्तुतियां सुनें. (१) अयामि घोष इन्द्र देवजामिरिरज्यन्त यच्छुरुधो विवाचि. नहि स्वमायुश्चिकिते जनेषु तानीदंहांस्यति पर्ष्यस्मान्.. (२) हे इंद्र! जब ओषधियां बढ़ती हैं, तब देवों को प्रिय लगने वाले शब्द बोले जाते हैं. मानवों में कोई भी अपनी आयु नहीं जानता. तुम हमारे पापों को दूर करो. (२) युजे रथं गवेषणं हरिभ्यामुप ब्रह्माणि जुजुषाणमस्थुः. वि बाधिष्टस्य रोदसी महित्वेन्द्रो वृत्राण्यप्रती जघन्वान्.. (३) मैं इंद्र के गायों को खोजने वाले रथ को हरि नामक अश्वों से युक्त करता हूं. सब लोग स्तुतियां स्वीकार करने वाले इंद्र की सेवा करते हैं. इंद्र ने अपनी शक्ति से द्यावा-पृथिवी को बाधा पहुंचाई है तथा शत्रुसमूह का नाश किया है. (३) आपश्चित्पिप्युः स्तर्यो३ न गावो नक्षन्नृतं जरितारस्त इन्द्र. याहि वायुर्न नियुतो नो अच्छा त्वं हि धीभिर्दायसे वि वाजान्.. (४) हे इंद्र! जिस प्रकार बिना ब्याई गाय मोटी होती है, उसी प्रकार तुम्हारी कृपा से जल बढ़े एवं तुम्हारे स्तोता जल को प्राप्त करें. वायु जिस प्रकार घोड़ों के पास जाती है, उसी प्रकार तुम हमारे पास आओ. तुम यज्ञकर्मों द्वारा अन्न देते हो. (४) ते त्वा मदा इन्द्र मादयन्तु शुष्मिणं तुविराधसं जरित्रे. एको देवत्रा दयसे हि मर्तानस्मिञ्छुछ्र सवने मादयस्व.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*