भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1081, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1081

अस्तं तात्या धिया रयिं सुवीरं पृक्षो नो अर्वा न्युहीत् वाजी.. (६) हे इंद्र! तुम हमारी स्तुतियों को कब समझोगे? हम स्तोताओं को तुम इसी समय अपने स्थान में आश्रय दो. तुम्हारा शक्तिशाली घोड़ा हमारी स्तुति के कारण संतानसहित अन्न हमारे घर लावे. (६) अभि यं देवी निर्ऋतिश्चिदीशे नक्षन्त इन्द्रं शरदः सुपृक्षः. उप त्रिबन्धुर्जरदष्टिमेत्यस्ववेशं यं कृणवन्त मर्ताः.. (७) देवी निर्ऋति स्वामी बनाने के लिए इंद्र को व्याप्त करती है. शोभन अन्न वाले वर्ष इंद्र को व्याप्त करते हैं. मरणशील स्तोता इंद्र को अपने घर में बैठाता है. तीनों लोकों को धारण करने वाले इंद्र अन्न को पचाने वाला बल देते हैं. (७) आ नो राधांसि सवितः स्तवध्या आ रायो यन्तु पर्वतस्य रातौ. सदा नो दिव्यः पायुः सिषक्तु यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (८) हे सविता! स्तुतियोग्य धन तुम्हारे पास से हमारे समीप आवे. मेघ द्वारा धन देने पर धन हमें प्राप्त हो. दिव्य एवं रक्षक इंद्र हमारी सदा रक्षा करें. तुम कल्याणसाधनों द्वारा सदा हमारी रक्षा करो. (८) सूक्त—३८ देवता—सविता उदु ष्य देवः सविता ययाम हिरण्ययीममतिं यामशिश्रेत्. नूनं भगो हव्यो मानुषेभिर्वि यो रत्ना पुरूवसुर्दधाति.. (१) सविता जिस स्वर्णमय रूप का आश्रय लेते हैं, उसीको उत्पन्न करते हैं। सूर्य निश्चय ही मनुष्यों द्वारा स्तुतियोग्य हैं. विविध संपत्तियों वाले सविता स्तोताओं को रमणीय धन देते हैं. (१) उदु तिष्ठ सवितः श्रुध्य१स्य हिरण्यपाणे प्रभृतावृतस्य. व्यु१र्वी पृथ्वीममतिं सृजान आ नृभ्यो मर्तभोजनं सुवानः.. (२) हे सविता! तुम उदय करो. हे सोने के हाथों वाले सविता! तुम हमारी अभिलाषा पूर्ण करने के लिए हमारा स्तोत्र सुनो. तुम विस्तृत एवं असीमित प्रभा उत्पन्न करते हो एवं स्तोताओं को मानवभोग योग्य धन देते हो. (२) अपि ष्टुतः सविता देवो अस्तु यमा चिद्विश्वे वसवो गृणन्ति. स नः स्तोमान्नमस्य१श्नो धाद्विश्वेभिः पातु पायुभिर्नि सूरीन्.. (३) हम सविता देव की स्तुति करें. सब देव जिनकी स्तुति करते हैं, वे ही नमस्कारयोग्य ebook converter DEMO Watermarks*

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