ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1082, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसविता हमारे स्तोत्रों एवं अन्नों को धारण करें तथा समस्त रक्षासाधनों द्वारा स्तोताओं की रक्षा करें. (३) अभि यं देव्यदितिर्गृणाति सवं देवस्य सवितुर्जषाणा. अभि सम्राजो वरुणो गृणन्त्यभि मित्रासो अर्यमा सजोषाः.. (४) सविता देव की आज्ञा का पालन करती हुई अदिति देवी उनकी स्तुति करती हैं. भली प्रकार सुशोभित वरुण आदि उनकी स्तुति करते हैं. मित्र एवं अर्यमा समान प्रेम द्वारा उनकी स्तुति करते हैं. (४) अभि ये मिथो वनुषः सपन्ते रातिं दिवो रातिषाचः पृथिव्याः. अहिर्बुध्न्य उत नः शृणोतु वरूत्र्येकधेनुभिर्नि पातु.. (५) दान करने वाले एवं सेवानिपुण यजमान परस्पर संगत होकर स्वर्ग एवं धरती के मित्र सविता की सेवा करते हैं. अहिर्बुध्न्य हमारा स्तोत्र सुनें. सरस्वती प्रमुख धेनुओं द्वारा हमारा भली-भांति पालन करें. (५) अनु तन्नो जास्पतिर्मंसीष्ट रत्नं देवस्य सवितुरियानः. भगमुग्रोऽवसे जोहवीति भगमनुग्रो अध याति रत्नम्.. (६) प्रजापालक सविता देव हमारी याचना सुनकर अपना प्रसिद्ध धन हमें दें. उग्र स्तोता हमारी रक्षा के लिए भग नामक देव को बार-बार बुलाता है. असमर्थ स्तोता भग से रत्न मांगता है. (६) शं नो भवन्तु वाजिनो हवेषु देवताता मितद्रवः स्वर्काः. जम्भयन्तोऽहिं वृकं रक्षांसि सनेम्यस्मद्युयवन्नमीवाः.. (७) यज्ञ के स्तोत्रों के समय सीमित गति एवं शोभन अन्न वाले वाजी नामक देव हमें सुख देने वाले हों. वे हननकर्त्ता एवं चोर राक्षसों को नष्ट करते हुए पुराने रोगों को हमसे पृथक् करें. (७) वाजेवाजेऽवत वाजिनो नो धनेषु विप्रा अमृता ऋतज्ञाः. अस्य मध्वः पिबत मादयध्वं तृप्ता यात पथिभिर्देवयानैः.. (८) हे बुद्धिमान्, मरणरहित एवं सत्य को जानने वाले वाजी नामक देवो! तुम धन के कारण होने वाले प्रत्येक युद्ध में हमारी रक्षा करो. तुम इस सोम को पीकर प्रमुदित बनो एवं देवयान मार्गों द्वारा जाओ. (८) सूक्त—३९ देवता—विश्वेदेव ebook converter DEMO Watermarks*