ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1096, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअजरासस्ते सख्ये स्याम पितेव पुत्रान्प्रति नो जुषस्व.. (२) हे वास्तोष्पति! तुम हमारे धन को बढ़ाओ एवं उसका विस्तार करो. हे सोम के समान प्रसन्न करने वाले देव! हम तुम्हारे मित्र बनकर घोड़ों एवं गायों के स्वामी तथा जरारहित हों. जिस प्रकार पिता पुत्र की रक्षा करता है, उसी प्रकार तुम हमारी रक्षा करो. (२) वास्तोष्पते शग्मया संसदा ते सक्षीमहि रण्वया गातुमत्या. पाहि क्षेम उत योगे वरं नो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (३) हे वास्तोष्पति! हम तुम्हारे सुखकारक, सुंदर एवं संपत्तियुक्त स्थान से संगत हों. तुम हमारे प्राप्त एवं अप्राप्त धन की रक्षा करो. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (३) सूक्त—५५ देवता—वास्तोष्पति आदि अमीवहा वास्तोष्पते विश्वा रूपाण्याविशन्. सखा सुशेव एधि नः.. (१) हे रोगनाशक वास्तोष्पति! तुम समस्त रूपों में प्रवेश करते हुए हमारे सखा एवं सुखदायक बनकर बढ़ो. (१) यदर्जुन सारमेय दतः पिशङ्ग यच्छसे. वीव भ्राजन्त ऋष्टय उप स्रक्वेषु बप्सतो नि षु स्वप.. (२) हे श्वेत एवं पीले रंग के कुत्ते! जब भूंकते समय तुम दांत निकालते हो, तब आयुधों के समान चमकते हुए तुम्हारे दांत होंठों में बहुत अच्छे लगते हैं. इस समय तुम भली प्रकार सोओ. (२) स्तेनं राय सारमेय तस्करं वा पुनःसर. स्तोतॄनिन्द्रस्य रायसि किमस्मान्दुच्छुनायसे नि षु स्वप.. (३) हे एक स्थान में बार-बार आने वाले सारमेय! तुम चोरों और लुटेरों के पास जाओ. इंद्र के स्तोता हम लोगों के पास क्यों आते हो? हमें कष्ट क्यों देते हो? तुम सुखपूर्वक सोओ. (३) त्वं सूकरस्य दर्दृहि तव दर्दर्तु सूकरः. स्तोतॄनिन्द्रस्य रायसि किमस्मान्दुच्छुनायसे नि षु स्वप.. (४) तुम सूअर को विदीर्ण करो एवं सूअर तुम्हें विदीर्ण करे. इंद्र के स्तोता हम लोगों के पास क्यों आते हो? हमें कष्ट क्यों देते हो? तुम सुखपूर्वक सोओ. (४) सस्तु माता सस्तु पिता सस्तु श्वा सस्तु विश्पतिः. ebook converter DEMO Watermarks*