ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1117, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ शुभ्रा यातमश्विना स्वश्वा गिरो दस्रा जुजुषाणा युवाकोः. हव्यानि च प्रतिभृता वीतं नः.. (१) हे दीप्तियुक्त, शोभन अश्वों वाले एवं शत्रुहंता अश्विनीकुमारो! तुम अपने भक्त की स्तुतियों की कामना करो एवं हमारे द्वारा प्रस्तुत हव्य का भक्षण करो. (१) प्र वामन्धांसि मद्यान्यस्थुररं गन्तं हविषो वीतये मे. तिरो अर्यो हवनानि श्रुतं नः.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे लिए मदकारक अन्न स्थापित हैं. तुम हमारा हव्य भक्षण करने के लिए जल्दी आओ. तुम हमारे शत्रुओं की पुकार का तिरस्कार करके हमारी पुकार सुनो. (२) प्र वां रथो मनोजवा इयर्ति तिरो रजांस्यश्विना शतोतिः. अस्मभ्यं सूर्यावसू इयानः.. (३) हे सूर्य के साथ रहने वाले अश्विनीकुमारो! तुम्हारा मन के समान तेज चलने वाला एवं सैकड़ों रक्षासाधनों से युक्त रथ हमारी प्रार्थना पर लोगों का तिरस्कार करके हमारे यज्ञ में आता है. (३) अयं ह यद्वां देवया उ अद्रिरूर्ध्वो विवक्ति सोमसुद्युवभ्याम्. आ वल्गू विप्रो ववृतीत हव्यैः.. (४) हे सुंदर अश्विनीकुमारो! तुम्हारी अभिलाषा से सोमलता कूटने वाला पत्थर ऊंचा शब्द करता है, उस समय मेधावी ऋत्विज् तुम्हें हव्यों द्वारा आकर्षित करता है. (४) चित्रं ह यद्वां भोजनं न्वस्ति न्यत्रये महिष्वन्तं युयोतम्. यो वामोमानं दधते प्रियः सन्.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा जो विचित्र धन है, उसे हमें दो. जो तुम्हारे प्रिय हैं एवं तुम्हारा दिया हुआ धन धारण करते हैं, उन अत्रि ऋषि से महिष्वत को अलग करो. (५) उत त्यद्वां जुरते अश्विना भूच्च्यवानाय प्रतीत्यं हविर्दे. अधि यद्रूपं इतिऊर्ति धत्थः.. (६) हे अश्विनीकुमारो! तुमने अपने स्तुतिकर्त्ता एवं हव्यदाता वृद्ध च्यवन ऋषि को मृत्यु के पास से लाकर जो रूप दिया था, वह प्रसिद्ध है. (६) उत त्यं भुज्युमश्विना सखायो मध्ये जहुर्दुरेवासः समुद्रे. निरीं पर्षदरावा यो युवाकुः (७) बुरे साथियों ने भुज्यु को समुद्र में त्याग दिया था. हे अश्विनीकुमारो! तुम्हीं ने उसे पार ebook converter DEMO Watermarks*