ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1118, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिया. वह तुम्हारा भक्त एवं अनुकूलचारी रहा. (७) वृकाय चिज्जसमानाय शक्तमुत श्रुतं शयवे हूयमाना. यावच्यामपिन्वतमपो न स्तर्यं चिच्छक्त्यश्विना शचीभिः.. (८) हे अश्विनीकुमारो! तुमने क्षीण होते हुए वृक ऋषि को अपने कर्म एवं बुद्धि द्वारा धन दिया. पुकार लगाते हुए शंयु की बात तुम्हीं ने सुनी और बूढ़ी गाय को जलपूर्ण नदी के समान दुधारू बना दिया. (८) एष स्य कारुर्जरते सूक्तैरग्रे बुधान उषसां सुमन्मा. इषा तं वर्धदघ्न्या पयोभिर्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (९) हे अश्विनीकुमारो! यह शोभनबुद्धि वाला स्तोता उषा से पहले ही जागकर सूक्तों द्वारा तुम्हारी स्तुति करता है. उसे अन्न, दूध एवं गायों द्वारा बढ़ाओ. हे देवो! अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (९) सूक्त-६९ देवता-अश्विनीकुमार आ वां रथो रोदसी बद्धधानो हिरण्ययो वृषभिर्यात्वश्वैः. घृतवर्तनिः पविभी रुचान इषां वोळ्हा नृपतिर्वाजिनीवान्.. (१) हे अश्विनीकुमारो! जवान घोड़ों वाला तुम्हारा रथ आवे. वह रथ द्यावा-पृथिवी को बाधित करने वाला, सोने का बना हुआ, पहियों में जल धारण करने वाला, डंडों द्वारा चमकता हुआ, अन्न ढोने वाला, यजमानों द्वारा प्रदत्त हव्य से युक्त एवं यजमानों का नेता है. (१) स पप्रथानो अभि पञ्च भूमा त्रिवन्धुरो मनसा यातु युक्तः. विशो येन गच्छथो देवयन्तीः कुत्रा चिद्याममश्विना दधाना.. (२) हे अश्विनीकुमारो! जिस रथ पर बैठकर तुम किसी भी स्थान में देवाभिलाषी यजमानों के पास पहुंच जाते हो, वह पांचों भूतों को प्रसिद्ध करने वाला, तीन वंधुरों (सारथि के बैठने की जगह) से युक्त एवं हमारी स्तुतियों का पात्र है. (२) स्वश्वा यशसा यातमर्वाग्दसा निधिं मधुमन्तं पिबाथः. वि वां रथो वध्वा३ याद्मानोऽन्तान्दिवो बाधते वर्तनिभ्याम्.. (३) हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! सुंदर घोड़ों द्वारा शोभन अन्न लेकर तुम हमारे सामने आओ एवं मधुरतापूर्ण सोम का पान करो. सूर्य के साथ गंतव्य की ओर जाने वाला तुम्हारा रथ तेज चलने के कारण अपने पहियों से स्वर्ग के भागों को पीड़ा पहुंचाता है. (३) ebook converter DEMO Watermarks*