ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1122, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंराज्यच्युत होने पर पुनः स्थापित किया. (५) इयं मनीषा इयमश्विना गीरिमां सुवृक्तिं वृषणा जुषेथाम्. इमा ब्रह्माणि युवयून्यग्मन् यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६) हे अभिलाषापूरक अश्विनीकुमारो! यह स्तुति एवं वाणी तुम्हारे लिए है. तुम इस शोभनस्तुति को स्वीकार करो. ये समस्त यज्ञकर्म तुम्हारी कामना करते हुए तुम्हें प्राप्त हों. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (६) सूक्त—७२ देवता—अश्विनीकुमार आ गोमता नासत्या रथेनाश्वावता पुरुश्चन्द्रेण यातम्. अभि वां विश्वा नियुतः सचन्ते स्पार्हया श्रिया तन्वा शुभाना.. (१) हे अश्विनीकुमारो! तुम गो, अश्व एवं धन से संपन्न रथ के द्वारा आओ. बहुत सी स्तुतियां तुम्हारी सेवा करती हैं. तुम चाहने योग्य शोभा एवं शरीर से युक्त हो. (१) आ नो देवेभिरुप यातमर्वाक् सजोषसा नासत्या रथेन. युवोर्हि नः सख्या पित्र्याणि समानो बन्धुरुत तस्य वित्तम्.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम समान प्रीति वाले देवों को लेकर रथ द्वारा हमारे सामने आओ. तुम्हारे साथ हमारी पैतृक मित्रता है. हमारे एवं तुम्हारे बांधव एवं धन समान ही है. (२) उदु स्तोमासो अश्विनोरबुध्रञ्ज्जामि ब्रह्मण्युषसश्च देवीः. आविवासन्रोदसी धिष्ण्येमे अच्छा विप्रो नासत्या विवक्ति.. (३) स्तुतियां अश्विनीकुमारों को भली प्रकार जगाती हैं. बंधुतारूपी समस्त यज्ञकर्म उषा को जगाते हैं. बुद्धिमान् वसिष्ठ स्तुतियोग्य द्यावा-पृथिवी की सेवा करता हुआ अश्विनीकुमारों के सामने स्तुति करता है. (३) वि चेदुच्छन्त्यश्विना उषासः प्र वां ब्रह्माणि कारवो भरन्ते. ऊर्ध्वं भानुं सविता देवो अश्रेद्बृहदग्नयः समिधा जरन्ते.. (४) हे अश्विनीकुमारो! उषाएं अंधकारों का नाश करती हैं. स्तोता तुम्हारी स्तुति विशेषरूप से करते हैं. सविता देव ऊंचे तेज को धारण करते हैं एवं समिधाओं द्वारा प्रज्वलित अग्नि की स्तुति की जाती है. (४) आ पश्चातान्नासत्या पुरस्तादाश्विना यातमधरादुदक्तात्. आ विश्वतः पाञ्चजन्येन राया यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*