ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1123, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे अश्विनीकुमारो! तुम पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण से आओ. तुम पांच वर्णों का हित करने वाली संपत्तियों के साथ सब ओर से आओ. हे देवो! कल्याणसाधनों द्वारा तुम सदा हमारी रक्षा करो. (५) सूक्त—७३ देवता—अश्विनीकुमार अतारिष्म तमसरपारमस्य प्रति स्तोमं देवयन्तो दधानाः. पुरुदंसा पुरुतमा पुराजामर्त्या हवेते अश्विना गीः.. (१) हम देवों की अभिलाषा से स्तुतियां बोलते हुए अंधकार के पार जावें. हे अनेक कर्मों वाले, परम विशाल, पहले उत्पन्न हुए एवं मरणरहित अश्विनीकुमारो! स्तोता तुम्हें बुलाता है. (१) न्यु प्रियो मनुषः सादि होता नासत्या यो यजते वन्दते च. अश्रीतं मध्वो अश्विना उपाक आ वां वोचे विदथेषु प्रयस्वान्.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा प्रिय मनुष्य यहां बैठा है. जो तुम्हारा यज्ञ एवं वंदना करता है, उसके पास ठहरकर तुम उसका मधुर सोमरस पिओ, मैं अन्नयुक्त होकर तुम्हें बुलाता हूं. (२) अहेम यज्ञं पथामुराणा इमां सुवृक्तिं वृषणा जुषेथाम्. श्रुष्टीवेव प्रेषितो वामबोधि प्रति स्तोमैर्जरमाणो वसिष्ठः.. (३) महान् स्तोत्र बोलने वाले हम आने वाले देवों के लिए यज्ञ एवं हवि बढ़ाते हैं. हे अभिलाषापूरक अश्विनीकुमारो! इस शोभनस्तुति को स्वीकार करो. जिस प्रकार तेज दौड़ने वाला दूत आता है, उसी प्रकार मैं वसिष्ठ स्तुतियां करता हुआ तुम्हारे सम्मुख प्रबुद्ध हूं. (३) उप त्या वह्नी गमतो विशं नो रक्षोहणा सम्भृता वीळुपाणी. समन्धांस्यग्मत मत्सराणि मा नो मर्धिष्टमा गतं शिवेन.. (४) हव्य-वहन करने वाले, राक्षसनाशक, पुष्ट शरीर वाले एवं मजबूत हाथों वाले दोनों अश्विनीकुमार हमारी प्रजा के समीप आवें. हे अश्विनीकुमारो! तुम प्रसन्नताकारक अन्न से मिलो, हमारी हिंसा मत करो एवं कल्याणसाधनों के साथ आओ. (४) आ पश्चातान्नासत्या पुरस्तादाश्विना यातमधरादुदक्तात्. आ विश्वतः पाञ्चजन्येन राया यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण से आओ. तुम पांच वर्णों का हित करने वाली संपत्ति के साथ सब ओर से आओ. हे देवो! कल्याणसाधनों द्वारा तुम सदा हमारी रक्षा करो. (५) eBook converter DEMO Watermarks*