भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1124, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1124

सूक्त—७४ देवता—अश्विनीकुमार इमा उ वां दिविष्टय उस्रा हवन्ते अश्विना. अयं वामह्वेऽवसे शचीवसू विशंविशं हि गच्छथः.. (१) हे निवासदाता अश्विनीकुमारो! स्वर्ग चाहने वाले लोग तुम्हें बुलाते हैं. हे कर्मरूपी धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! यह वसिष्ठ भी रक्षा के लिए तुम्हें बुलाता है, क्योंकि तुम सब प्रजाओं के पास जाते हो. (१) युवं चित्रं ददथुर्भोजनं नरा चोदेथां सूनृतावते. अर्वाग्रथं समनसा नि यच्छतं पिबतं सोम्यं मधु.. (२) हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम्हारे पास जो उपभोग के योग्य धन है, उसे स्तोता के पास जाने की प्रेरणा दो. तुम समान रूप से प्रसन्न होकर अपना रथ हमारे सामने लाओ एवं मधुर सोमरस पिओ. (२) आ यातमुप भूषतं मध्वः पिबतमश्विना. दुग्धं पयो वृषणा जेन्यावसू मा नो मर्धिष्टमा गतम्.. (३) हे अश्विनीकुमारो! आओ, हमारे पास बैठो एवं सोमरस पिओ. हे अभिलाषापूरक एवं धन जीतने वाले अश्विनीकुमारो! जल का दोहन करो, हमें मत मारो एवं जाओ. (३) अश्वासो ये वामुप दाशुषो गृहं युवां दीयन्ति बिभ्रतः. मक्षूयुभिर्नरा हयेभिरश्विना देवा यातमस्मयू.. (४) हे नेता अश्विनीकुमारो! जो घोड़े तुम्हें हव्यदाता यजमान के घर में धारण करते हुए पहुंचते हैं, उन्हीं तेज चलने वाले घोड़ों की सहायता से तुम हमारी कामना करते हुए आओ. (४) अधा ह यन्तो अश्विना पृक्षः सचन्त सूरयः. ता यंसतो मघवद्भ्यो ध्रुवं यशश्छर्दिरस्मभ्यं नासत्या.. (५) हे अश्विनीकुमारो! स्तुतियों के उच्चारण के साथ चलने वाला यजमान एवं बुद्धिमान् स्तोता बहुत सा अन्न धारण करते हैं. हम अन्नधारियों को स्थायी यश एवं घर दो. (५) प्र ये ययुरवृकासो रथा इव नृपातारो जनानाम्. उत स्वेन शवसा शूशुवुर्नर उत क्षियन्ति सुक्षितिम्.. (६) हे अश्विनीकुमारो! दूसरे का धन ग्रहण न करने वाले एवं मनुष्यों में ऋत्विजों का रक्षण करने वाले जो यजमान रथ के समान तुम्हारे समीप आते हैं, वे अपनी शक्ति से बढ़ते हैं एवं ebook converter DEMO Watermarks*