ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1136, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरि नो हेळो वरुणस्य वृज्या उरुं न इन्द्रः कृणवदु लोकम्.. (२) हे इंद्र एवं वरुण! तुम्हारा स्वर्गरूप विस्तृत राष्ट्र वर्षा द्वारा सबको प्रसन्न करता है. तुम पापियों को बिना रस्सी वाली बाधाओं अर्थात् रोगादि से बांधो. वरुण का क्रोध हमसे दूर जावे एवं इंद्र हमारे निवासस्थान को विस्तृत करें. (२) कृतं नो यज्ञं विदथेषु चारुं कृतं ब्रह्माणि सूरिषु प्रशस्ता. उपो रयिर्देवजूतो न एतु प्र णः स्पार्हाभिरूतिभिस्तिरेतम्.. (३) हे इंद्र एवं वरुण! हमारे घरों में होने वाले यज्ञ को शोभन बनाओ एवं हमारे स्तोताओं की स्तुतियां उत्तम करो. तुम्हारे द्वारा प्रेरित धन हमारे पास आवे. तुम स्पृहणीय रक्षासाधनों द्वारा हमें बढ़ाओ. (३) अस्मे इन्द्रावरुणा विश्ववारं रयिं धत्तं वसुमन्तं पुरुक्षुम्. प्र य आदित्यो अनृता मिनात्यामिता शूरो दयते वसूनि.. (४) हे इंद्र एवं वरुण! हमारे लिए ऐसा धन दो जो सबके वरण करने योग्य हो एवं अन्न से पूरित निवासस्थान दो. जो शूर एवं अदितिपुत्र वरुण असत्य का नाश करते हैं, वे ही स्तोताओं को असीमित धन देते हैं. (४) इयमिन्द्रं वरुणमष्ट मे गीः प्रावत्तोके तनये तुतुजाना. सुरत्नासो देववीतिं गमेम यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) मेरी यह स्तुति इंद्र एवं वरुण के पास पहुंचे. मेरी स्तुति पुत्र एवं पौत्र की रक्षा का कारण बने. हम शोभनरत्न वाले होकर यज्ञ प्राप्त करें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५) सूक्त—८५ देवता—इंद्र व वरुण पुनीषे वामरक्षसं मनीषां सोममिन्द्राय वरुणाय जुह्वत्. घृतप्रतीकामुषसं न देवीं ता नो यामन्नुरुष्यतामभीके.. (१) हे इंद्र एवं वरुण! मैं तुम्हारे उद्देश्य से अग्नि में सोम की आहुति फेंकता हुआ उषा देवी के समान प्रदीप्त अवयव वाली एवं राक्षसों से असंपृक्त स्तुति अर्पित करता हूं. इंद्र व वरुण युद्ध में हमारी रक्षा करें. (१) स्पर्धन्ते वा उ देवहूये अत्र येषु ध्वजेषु दिद्यवः पतन्ति. युवं ताँ इन्द्रावरुणावमित्रान्हतं पराचः शर्वा विषूचः.. (२) हे इंद्र एवं वरुण! जिन युद्धों में शत्रु हमें ललकारते हैं एवं ध्वजाओं पर आयुध गिरते हैं, ebook converter DEMO Watermarks*