ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1154, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंन ते विष्णो जायमानो न जातो देव महिम्नः परमन्तमाप. उदस्तभ्ना नाकमृष्वं बृहन्तं दाधर्थ प्राचीं ककुभं पृथिव्याः.. (२) हे विष्णुदेव! धरती पर जन्म प्राप्त एवं भविष्य में उत्पन्न होने वालों में कोई भी तुम्हारी महिमा का अंत नहीं पा सकता. तुमने दर्शनीय एवं विशाल स्वर्गलोक ऊपर धारण किया है. तुमने पृथ्वी की पूर्व दिशा को भी धारण किया है. (२) इरावती धेनुमती हि भूतं सूयवसिनी मनुषे दशस्या. व्यस्तभ्ना रोदसी विष्णवेते दाधर्थ पृथिवीमभितो मयूखैः.. (३) हे द्यावा-पृथिवी! तुम स्तोता मनुष्य को दान करने की अभिलाषा से अन्न, धेनु एवं शोभन जौ से युक्त हुई हो. हे विष्णु! तुमने द्यावा-पृथिवी को अनेक प्रकार से धारण किया है. तुमने पृथ्वी को सर्वत्र स्थित पर्वतों की सहायता से धारण किया है. (३) उरुं यज्ञाय चक्रथुरु लोकं जनयन्ता सूर्यमुषासमग्निम्. दासस्य चिद्वृषशिप्रस्य माया जघ्नथुर्नरा पृतनाज्येषु.. (४) हे इंद्र एवं विष्णु! तुम दोनों ने सूर्य, उषा एवं अग्नि को उत्पन्न करके यजमान के लिए विस्तृत स्वर्गलोक को बनाया है. हे नेताओ! तुमने वृषशिप्र नामक दास की मायाओं को युद्धों में समाप्त कर दिया था. (४) इन्द्राविष्णू दृंहिताः शम्बरस्य नव पुरो नवतिं च श्रथिष्टम्. शतं वर्चिनः सहस्रं च साकं हथो अप्रत्यसुरस्य वीरान्.. (५) हे इंद्र एवं विष्णु! तुमने शंबर असुर की सुदृढ़ निन्यानवे नगरियों को समाप्त किया था. तुमने वर्चि नामक असुर के सैकड़ों और हजारों वीरों को नष्ट किया. (५) इयं मनीषा बृहती बृहन्तोऋक्रमा तवसा वर्धयन्ती. ररे वां स्तोमं विदथेषु विष्णो पिन्वतमिषो वृजनेष्विन्द्र.. (६) हमारी यह विशाल स्तुति महान्, विक्रमशाली एवं शक्तिशाली इंद्र व विष्णु को बढ़ाएगी. हे इंद्र एवं विष्णु! हमने यज्ञ में तुम्हारी स्तुति की है. युद्ध में तुम हमारा अन्न बढ़ाना. (६) वषट् ते विष्णोवास आ कृणोमि तन्मे जुषस्व शिपिविष्ट हव्यम्. वर्धन्तु त्वा सुष्टुतयो गिरो मे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) हे विष्णु! मैं यज्ञ में तुम्हारे लिए अपने मुख से वषट् शब्द बोलता हूं. हे तेजस्वी विष्णु! तुम हमारे हव्य को स्वीकार करो. हमारी शोभनस्तुति के वाक्य तुम्हारी वृद्धि करें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*