भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1153, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1153

द्वारा देवों के लिए धन प्राप्त किया. (३) यद्योधया महतो मन्यमानान्त्साक्षाम तान् बाहुभिः शाशदानान्. यद्वा नृभिर्वृत इन्द्राभियुध्यास्तं त्वयाजिं सौश्रवसं जयेम.. (४) हे इंद्र! अपने आपको बड़ा मानने वाले योद्धाओं के साथ तुम जब हमारा युद्ध कराओगे, तब उन हिंसक शत्रुओं को हम हाथों से ही हरा देंगे. हे इंद्र! यदि मरुतों को साथ लेकर तुम स्वयं युद्ध करोगे, तो हम तुम्हारी सहायता से उस शोभन अन्नप्राप्ति वाले युद्ध में विजय पाएंगे. (४) प्रेन्द्रस्य वोचं प्रथमा कृतानि प्र नूतना मघवा या चकार. यदेददेवींरसहिष्ट माया अथाभवत्केवलः सोमो अस्य.. (५) मैं इंद्र के प्राचीन कार्यों का वर्णन करता हूं. इंद्र ने जो नए कार्य किए हैं, मैं उन्हें भी कहता हूं. इंद्र ने असुरों की मायाओं को पराजित किया है, इसलिए सोमरस केवल इंद्र के लिए ही है. (५) तवेदं विश्वमभितः पशव्यं१ यत्पश्यसि चक्षसा सूर्यस्य. गवामसि गोपतिरेक इन्द्र भक्षीमहि ते प्रयतस्य वस्वः.. (६) हे इंद्र! प्राणियों के लिए हितकारक विश्व चारों ओर स्थित है. उसे तुम सूर्य के प्रकाश की सहायता से देखते हो. यह विश्व तुम्हारा ही है. एकमात्र तुम्हीं गायों के स्वामी हो. हम तुम्हारे द्वारा दिया हुआ धन भोगते हैं. (६) बृहस्पते युवमिन्द्रश्च वस्वो दिव्यस्येशाथे उत पार्थिवस्य. धत्तं रयिं स्तुवते कीरये चिद्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) हे बृहस्पति! तुम एवं इंद्र दोनों प्रकार के पार्थिव एवं दिव्य धन के स्वामी हो. इसलिए तुम स्तुतिकर्त्ता को धन देते हो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (७) सूक्त—९९ देवता—इंद्र व विष्णु परो मात्रया तन्वा वृधान न ते महित्वमन्वश्नुवन्ति. उभे ते विद्म रजसी पृथिव्या विष्णो देव त्वं परमस्य वित्से.. (१) हे विष्णु! शब्द, स्पर्श आदि पंचतन्मात्राओं से अतीत तुम्हारा शरीर जब वामन अवतार के समय बढ़ता है, तब तुम्हारी महिमा कोई नहीं जान सकता. हम तुम्हारे दो लोकों अर्थात् धरती एवं अंतरिक्ष को जानते हैं, पर परम लोक को तुम ही जानते हो. (१) ebook converter DEMO Watermarks*