ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1158, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंगवामह न मायुर्वत्सिनीनां मण्डूकानां वग्नुरत्रा समेति.. (२) मेंढक सूखे चमड़े के समान तालाब में सोए हुए थे. स्वर्ग का जल जब उन पर बरसता है, तब वे बछड़े वाली गायों के समान शब्द करने लगते हैं. (२) यदीमेनाँ उशतो अभ्यवर्षीत्तृष्यावतः प्रावृष्यागतायाम्. अख्खलीकृत्या पितरं न पुत्रो अन्यो अन्यमुप वदन्तमेति.. (३) वर्षा ऋतु आने पर जब पर्जन्य अभिलाषा करने वाले एवं प्यासे मेंढकों पर जल बरसाते हैं, उस समय मेंढक ‘अख्खल’ शब्द करते हुए एक-दूसरे के पास इस प्रकार जाते हैं, जिस प्रकार खिलखिलाता हुआ बालक पिता के पास जाता है. (३) अन्यो अन्यमनु गृभ्णात्येनोरपां प्रसर्गे यदमन्दिषाताम्. मण्डूको यदभिवृष्टः कनिष् कन्पृश्निः सम्पृङ्क्ते हरितेन वाचम्.. (४) जल बरसने के समय दो प्रकार के मेंढक प्रसन्न होते हैं एवं वर्षा के जल से भीगकर लंबी छलांगें लगाते हैं. भूरे रंग का मेंढक हरे रंग वाले मेंढकों के साथ अपना स्वर मिलाता है. उस समय एक मेंढक दूसरे पर अनुग्रह करता है. (४) यदेषामन्यो अन्यस्य वाचं शाक्तस्येव वदति शिक्षमाणः. सर्वं तदेषां समृद्धेव पर्व यत्सुवाचो वदथनाध्यप्सु.. (५) जब एक मेंढक दूसरे के शब्द का इस तरह अनुकरण करता है, जिस तरह शिष्य गुरु के शब्द दोहराता है एवं जल के ऊपर उछलते हुए सब मेंढक शब्द करते हैं. हे मेंढको! उस समय तुम्हारे शरीर के सभी जोड़ ठीक हो जाते हैं. (५) गोमायुरेको अजमायुरेकः पृश्निरेको हरित एक एषाम्. समानं नाम बिभ्रतो विरूपाः पुरुत्रा वाचं पिपिशुर्वदन्तः.. (६) मेंढकों में से कोई गाय की तरह बोलता है और कोई बकरी की तरह. एक का रंग भूरा होता है और दूसरे का हरा. एक नाम धारण करते हुए सब भिन्न रूप वाले होते हैं. मेंढक भिन्नभिन्न प्रकार के शब्द करते हुए प्रकट होते हैं. (६) ब्राह्मणासो अतिरात्रे न सोमे सरो न पूर्णमभितो वदन्तः. संवत्सरस्य तदहः परिष्ठ यन्मण्डूकाः प्रावृषीणं बभूव.. (७) हे मेंढको! जिस दिन अधिक वर्षा हो, उस दिन तुम इस प्रकार शब्द करते हुए तालाब में चारों ओर घूमो, जिस प्रकार अतिरात्र नामक यज्ञ में ब्राह्मण सोमरस के चारों ओर मंत्र पढ़ते हैं. (७) ebook converter DEMO Watermarks*