ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1159, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मणासः सोमिनो वाचमक्रत ब्रह्म कृण्वन्तः परिवत्सरीणम्. अध्वर्यवो घर्मिणः सिष्विदाना आविर्भवन्ति गुह्या न के चित्.. (८) ये मेंढक उसी प्रकार बोलते हैं, जिस प्रकार सोमरस धारण करने वाले स्तोता वार्षिक स्तुति करते हैं. प्रवर्ग का आचरण करने वाले ऋत्विजों के समान धूप से गीले शरीर वाले एवं बिलों में छिपे हुए मेंढक प्रकट होते हैं. (८) देवहितं जुगुपुर्द्वादशस्य ऋतुं नरो न प्र मिनन्त्येते. संवत्सरे प्रावृष्यागतायां तप्ता घर्मा अश्नुवते विसर्गम्.. (९) नेताओं के समान ये मेंढक देवनिर्मित नियमों का पालन करते हैं तथा बारह महीनों के रूप में आने वाली ऋतुओं को नष्ट नहीं करते. एक वर्ष बीतने पर जब वर्षा आती है तो गरमी के ताप से दुःखी मेंढक गड्ढों से बाहर निकलते हैं. (९) गोमायुरदादजमायुरदात्पृश्निरदाद्धरितो नो वसूनि. गवां मण्डूका ददतः शतानि सहस्रसावे प्र तिरन्त आयुः.. (१०) गाय की तरह बोलने वाला, बकरी की तरह बोलने वाला, भूरे रंग का एवं हरे रंग का मेंढक हमें संपत्ति दे. हजारों ओषधियों को उत्पन्न करने वाली वर्षार्ऋतु में मेंढक सैकड़ों गाएं देते हुए हमारी आयुवृद्धि करें. (१०) सूक्त—१०४ देवता—सोम आदि इन्द्रासोमा तपतं रक्ष उब्जतं न्यर्पयतं वृषणा तमोवृधः. परा शृणीतमचितो न्योषतं हतं नुदेथां नि शिशीतमत्रिणः.. (१) हे इंद्र तथा सोम! तुम राक्षसों को कष्ट दो तथा उनको नष्ट करो. हे अभिलाषापूरको! तुम अंधकार में बढ़ने वाले राक्षसों को नीचे गिराओ. तुम अज्ञानी राक्षसों को परांगमुख करके नष्ट करो, जलाओ, मारो, फेंक दो एवं मनुष्यभक्षी राक्षसों को घायल करो. (१) इन्द्रासोमा समघशंसमभ्य१घं तपुर्ययस्तु चरुरग्निवाँ इव. ब्रह्मद्विषे क्रव्यादे घोरचक्षसे द्वेषो धत्तमनवायं किमीदिने.. (२) हे इंद्र एवं सोम! तुम पाप की प्रशंसा करने वाले राक्षसों को भली प्रकार नष्ट करो. तुम अपने तेज द्वारा संतप्त राक्षसों को इस प्रकार समाप्त कर दो, जिस प्रकार अग्नि में डाला हुआ चरु लुप्त हो जाता है. ब्राह्मणों से द्वेष रखने वाले, मांसभक्षक, डरावने नेत्रों वाले एवं कठोरभाषी राक्षसों के प्रति ऐसा व्यवहार करो, जिससे उनके प्रति तुम्हारा सदा द्वेष रहे. (२) इन्द्रासोमा दुष्कृतो वव्रे अन्तरनारम्भणे तमसि प्र विध्यतम्. ebook converter DEMO Watermarks*