ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 116, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंकुशा बिछाना, बल, रत्न, सुख, अन्न व मंगल, याचना, आह्वान, शतक्रतु, वृत्रहंता, ऋषि ऋभुक्षा व ऋभु २५-३४ ८३. मरुद्गण का वर्णन १-१२ सोमपान, व्रत धारण, स्तुति, सोमपान, प्रशंसा १-६ बुद्धिमान्, दीप्तिशाली, विस्तृत करना, बुलाना, स्तब्ध करना, बुलाना ७-१२ ८४. इंद्र की स्तुति १-९ स्तुतिपात्र, चरु-पुरोडाश, आने व सोमपान हेतु प्रार्थना, तिरश्ची ऋषि १-४ स्तुतिवचन का निर्माण, सेवा, दशापवित्र, आह्वान, शत्रुघातक ५-९ ८५. इंद्र का वर्णन १-२१ गति बढ़ाना, पर्वत तोड़ना, निकट पहुंचना, मानना, स्तुति, जीवोत्पत्ति, शत्रुजेता, बढ़ाना, तेज आयुध १-८ असुरों को भगाने व धन हेतु प्रार्थना, सेना का संहार, बुलाना, सहायता, आनंद देना, जल जीतना, शत्रुनाशक, रक्षक, बुलाने योग्य बनना ९-२१ ८६. इंद्र की स्तुति १-१५ धन छीनना, पणि, भेजने की प्रार्थना, वृत्रहंता, आह्वान, शक्तिस्वामी, रक्षा करने व साथ बैठने की प्रार्थना १-८ सर्वजेता, शक्तिशाली बनाना, स्तुति, बलशाली, वज्रधारी ९-१५ ८७. इंद्र की स्तुति १-१२ मेधावी, तेजस्वी बनाना, मित्रता हेतु यत्न, स्वर्गस्वामी, शत्रुनगरियों के नाशक, स्तोत्र भेजना, बढ़ाना १-८ जोड़ना, बल व धन याचना ९-१२ ८८. इंद्र की स्तुति १-८ सोमपान, निचोड़ना, धन उत्पत्ति, पापहीन धन देना, हराना १-५ सेना का नाश, शत्रुजेता, बुलाना ६-८ ebook converter DEMO Watermarks*