भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 1855 में से

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८९. इंद्र की स्तुति १-१२ शत्रुजेता, भाग रखना, नेम ऋषि, बढ़ाना, रोना, प्रकट करना, शरभ, वज्र मारना, सोम लाना, वज्र प्राप्ति १-९ जल दुहना, वाणी की उत्पत्ति, पराक्रम दिखाने की प्रार्थना १०-१२ ९०. मित्र, वरुण, अश्विनीकुमारों एवं सूर्या की स्तुति १-१६ हवि बनाना, कर्म करना, देवदूत, नशीला सोम, रक्षा याचना, प्रशंसा करने का आग्रह, स्थान देखना, आह्वान १-८ निश्चित करना, हव्य ले जाना, प्रशंसा उपदेशक, उषा का दिखाई देना, स्थित होना, गोवध न करने का आग्रह, दीप्तिशाली ९-१६ ९१. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-२२ अन्न देना, दीप्तिशाली, अतिशय युवा, बुलाना, आह्वान, सागरवासी, निकट आने व कर्त्तव्यों को बढ़ाने का आग्रह, आह्वान, यशस्वी, प्रज्वलित होना, स्तोता १-१२ सेवा करना, अग्नि में जल का होना, रक्षायुक्त होना, आह्वान, अग्नि की उत्पत्ति, देवों का चारों ओर बैठना, धारण करना १३-१९ लकड़ियां धारण, काठ, बढ़ाना २०-२२ ९२. अग्नि व मरुद्गण की स्तुति १-१४ स्तुतियों का जाना, स्वर्ग में रहना, कांपना, वीरपुत्र मिलना, शत्रु का अन्न नष्ट करना, पात्र मिलना, दर्शनीय, दाताश्रेष्ठ, यशदाता १-९ अतिप्रिय, धन न लाना, स्तुत, स्तुति, सोमपान हेतु प्रार्थना १०-१४ नवम मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. सोम की स्तुति १-१० सोम निचोड़ना, बैठना, अतिशय दाता, बल व अन्न मांगना, सेवा करना, दशापवित्र दस उंगलियां, तीन जगह, रहना, शुद्धि, धन प्राप्ति १-१० ebook converter DEMO Watermarks*