ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1165, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टम मंडल
सूक्त—१ देवता—इंद्र मा चिदन्यद्वि शंसत सखायो मा रिषण्यत. इन्द्रमित्स्तोता वृषणं सचा सेतु मुहुरुक्था च शंसत.. (१) हे मित्र स्तोताओ! तुम इंद्र के अतिरिक्त किसी की स्तुति मत करो. तुम क्षीण मत बनो. सोमरस निचुड़ जाने पर एकत्र होकर अभिलाषापूरक इंद्र की स्तुति करते हुए बार-बार स्तोत्र बोलो. (१) अवक्रक्षिणं वृषभं यथाजुरं गां न चर्षणीसहम्. विद्वेषणं संवननोभयङ्करं मंहिष्ठमुभयाविनम्.. (२) हे स्तोताओ! बैल के समान शत्रुनाशक, युवा बैल के समान शत्रुमानवों को जीतने वाले, शत्रुओं से द्वेष रखने वाले, स्तोताओं द्वारा सेवायोग्य, कृपा द्वारा दिव्य एवं पार्थिव दोनों प्रकार का धन देने वाले, दाताओं में श्रेष्ठ एवं दोनों प्रकार के धन से युक्त इंद्र की स्तुति करो. (२) यच्चिद्धि त्वा जना इमे नाना हवन्त ऊतये. अस्माकं ब्रह्मेदमिन्द्र भूतु तेऽहा विश्वा च वर्धनम्.. (३) हे इंद्र! ये लोग यद्यपि अपनी रक्षा के लिए तुम्हारी भांति-भांति से स्तुतियां करते हैं परंतु हमारा यह स्तोत्र तुम्हारा सदैव वृद्धिकारक हो. (३) वि तर्तूर्यन्ते मघवन् विपश्चितोऽर्यो विपो जनानाम्. उप क्रमस्व पुरुरूपमा भर वाजं नेदिष्ठमूतये.. (४) हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हारे विद्वान् स्तोता तुम्हारे शत्रु लोगों को भय के कारण कंपन उत्पन्न करते हैं एवं बार-बार विपत्तियों को पार कर जाते हैं. तुम हमारे पास आओ एवं हमारी रक्षा के लिए हमें अनेक रूप वाला एवं समीपवर्ती अन्न दो. (४) महे चन त्वामद्रिवः परा शुल्काय देयाम्. न सहस्राय नायुताय वज्रिवो न शताय शतामघ.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*