भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1166, कुल 1855 में से

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हे वज्रधारी इंद्र! मैं तुम्हें अधिकतम मूल्य में भी नहीं बेचूंगा. हे हाथ में वज्र रखने वाले इंद्र! मैं हजार, दस हजार अथवा असीमित धन के बदले भी नहीं बेच सकता. (५) वस्याँ इन्द्रासि मे पितुरुत भ्रातुर्भुज्जतः. माता च मे छदयथः समा वसो वसुत्वनाय राधसे.. (६) हे इंद्र! तुम मेरे पिता की अपेक्षा भी अधिक संपत्तिशाली हो. तुम मेरे न भागने वाले भाई से भी महान् हो. हे निवासयुक्त इंद्र! तुम एवं मेरी माता मिलकर मुझे व्यापक धन के लिए पूजित करो. (६) क्वेयथ क्वेदसि पुरुत्रा चिद्धि ते मनः. अलर्षि युध्म खजकृत् पुरन्दर प्र गायत्रा अगासिषुः.. (७) हे इंद्र! तुम कहां गए? तुम कहां हो? तुम्हारा मन विभिन्न दिशाओं में रहता है. हे युद्धकुशल, युद्धकर्त्ता एवं शत्रुनगरी को भेदने वाले इंद्र! आओ. स्तोता तुम्हारी स्तुतियां गाते हैं. (७) प्रास्मै गायत्रमर्चत वावातुर्यः पुरन्दरः. याभिः काण्वस्योप बर्हिरासदं यासद्वज्री भिनत्पुरः.. (८) हे स्तोताओ! इस इंद्र के लिए गाने योग्य स्तुतियां गाओ. शत्रुनगरी का भेदन करने वाले इंद्र सबके लिए सेवा करने योग्य हैं. जिन ऋचाओं को सुनकर इंद्र वज्र धारण करके कण्वपुत्रों के यज्ञ में बिछे कुशों पर बैठे थे एवं शत्रुओं की नगरियों को तोड़ा था, उन्हीं ऋचाओं द्वारा गाने योग्य स्तुति गाओ. (८) ये ते सन्ति दशग्विनः शतिनो ये सहस्रिणः. अश्वासो ये ते वृषणो रघुद्रुवस्तेभिर्नस्तूम्या गहि.. (९) हे इंद्र! तुम्हारे जो दश योजन चलने वाले सौ एवं एक हजार घोड़े हैं, वे अभिलाषापूरक एवं शीघ्रगामी हैं. उन घोड़ों की सहायता से यहां शीघ्र आओ. (९) आ त्वाद्य सबर्दुघां हुवे गायत्रवेपसम्. इन्द्रं धेनुं सुदुघामन्यामिषमुरुधारामरङ्कृतम्.. (१०) आज मैं दूध देने वाली, प्रशंसनीय चाल वाली एवं सरलता से दुहने योग्य इंद्ररूपी गाय की स्तुति करता हूं. इसके अतिरिक्त वह गाय उदकरूपी अनेक धाराओं वाली एवं मनचाही वर्षा करने वाली है. (१०) यत्तुदत् सूर एतशं वङ्कू वातस्य पर्णिना. वहत् कुत्समार्जुनयं शतक्रतुस्त्सरद् गन्धर्वमस्तृतम्.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*