ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1172, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सोम! तुम पवित्र, अनेक पात्रों में भरे हुए एवं दूध-दही से मिश्रित हो. तुम शूर इंद्र को सबसे अधिक प्रसन्न करते हो. (९) इमे त इन्द्र सोमास्तीव्रा अस्मे सुतासः. शुक्रा आशिरं याचन्ते.. (१०) हे इंद्र! ये तीखे सोम तुम्हारे लिए हैं. हमारे द्वारा निचोड़े हुए एवं दीप्तिशाली दूध-दही से मिले हुए सोम तुम्हारी अभिलाषा करते हैं. (१०) ताँ आशिरं पुरोळाशमिन्द्रेमं सोमं श्रीणीहि. रेवन्तं हि त्वा शृणोमि.. (११) हे इंद्र! तुम सोमों तथा दूध-दही आदि को मिलाओ. इस प्रकार मैं तुम्हें धन वाले के रूप में समझूं. (११) हृत्सु पीतासो युध्यन्ते दुर्मदासो न सुरायाम्. ऊधर्न नग्ना जरन्ते.. (१२) हे इंद्र! जिस प्रकार पी हुई शराब अतःकरण में परस्परविरोधी भाव उठाकर युद्ध कराती है, उसी प्रकार पिया हुआ सोम भी हृदय में युद्ध करता है. स्तोता सोमपूर्ण इंद्र की रक्षा गाय के थन के समान करते हैं. (१२) रेवाँ इद्रेवतः स्तोता स्यात्त्वावतो मघोनः. प्रेदु हरिवः श्रुतस्य.. (१३) हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! तुम धनवान् हो. तुम्हारा स्तोता भी धनवान् हो, तुम्हारे समान धनी एवं प्रसिद्ध व्यक्ति का स्तोता भी धन वाला ही होता है. (१३) उक्थं चन शस्यमानमगोररिरा चिकेत. न गायत्रं गीयमानम्.. (१४) स्तुति न करने वाले के शत्रु इंद्र गाए जाते हुए उक्थ को जान लेते हैं. उस समय गाने योग्य गान गाया जाता है. (१४) मा न इन्द्र पीयत्नवे मा शर्धते परा दाः. शिक्षा शचीवः शचीभिः.. (१५) हे इंद्र! तुम मुझे हिंसा करने वाले शत्रु के हाथ में मत सौंपना. तुम मुझे पराजित करने वाले के अधिकार में भी मत सौंपना. हे शक्तिशाली इंद्र! तुम अपने कर्मों द्वारा हमें शक्तिशाली बनाओ. (१५) वयमु त्वा तदिदर्था इन्द्र त्वायन्तः सखायः. कण्वा उक्थेभिर्जरन्ते.. (१६) हे इंद्र! हम तुम्हारे मित्र एवं तुम्हारी कामना करने वाले हैं. हम स्तोताओं का प्रयोजन तुम्हारी स्तुति करना है. हम कण्वगोत्रीय उक्थ मंत्रों द्वारा तुम्हारी स्तुति करते हैं. (१६) न घेमन्यदा पपन वज्रिन्नपसो नविष्ठौ. तवेदु स्तोमं चिकेत.. (१७) ebook converter DEMO Watermarks*