ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1174, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्तुतियोग्य सोमरस दो. (२५) पाता वृत्रहा सुतमा घा गमन्नारे अस्मत्. नि यमते शतमूतिः.. (२६) सोमरस पीने वाले एवं वृत्रनाशक इंद्र आवें. वे हमसे दूर न जावें. सैकड़ों रक्षासाधनों वाले इंद्र शत्रुओं को वश में करें. (२६) एह हरी ब्रह्मयुजा शग्मा वक्षतः सखायम्. गीर्भिः श्रुतं गिर्वणसम्.. (२७) हव्य अन्न से युक्त एवं सुखकारक घोड़े स्तुतियों द्वारा प्रसिद्ध एवं सेवा करने योग्य मित्र इंद्र को यहां ले आवें. (२७) स्वादवः सोमा आ याहि श्रीताः सोमा आ याहि. शिप्रिन्नृषीवः शचीवो नायमच्छा सधमादम्.. (२८) हे शिरस्त्राण वाले, ऋषियों से युक्त एवं शक्तिशाली इंद्र! यह सोम स्वादिष्ट है. तुम आओ. सोम में दूध-दही को मिला दिया गया है. तुम आओ. ये स्तोता इस समय तुम्हें अपने सामने बुलाते हैं. (२८) स्तुतश्च यास्त्वा वर्धन्ति महे राधसे नृम्णाय. इन्द्र कारिणं वृधन्तः.. (२९) हे इंद्र! यज्ञकर्म करने वालों को बढ़ाते हुए स्तोता एवं स्तोत्र धन एवं बल पाने के लिए तुम्हारी वृद्धि करते हैं. (२९) गिरश्च यास्ते गिर्वाह उक्था च तुभ्यं तानि. सत्रा दधिरे शवांसि.. (३०) हे स्तुतियों द्वारा वहन करने योग्य इंद्र! तुम्हारे निमित्त जो स्तुतियां एवं उक्थ हैं, वे सब एकत्र होकर तुम्हारी शक्ति को धारण करते हैं. (३०) एवेदेष तुविकूर्मिर्वाजाँ एको वज्रहस्तः. सनादमृक्तो दयते.. (३१) इंद्र अनेक कर्म करने वाले, अद्वितीय एवं वज्रधारी हैं. शत्रुओं द्वारा सदा अपराजेय इंद्र स्तोता को अन्न देते हैं. (३१) हन्ता वृत्रं दक्षिणेनेन्द्रः पुरू पुरुहूतः. महान्महीभिः शचीभिः.. (३२) बहुत से लोगों द्वारा अनेक बार बुलाए गए एवं महान् कर्मों द्वारा महान् इंद्र अपने दाहिने हाथ से वृत्र का नाश करते हैं. (३२) यस्मिन् विश्वाश्चर्षर्णय उत च्यौत्ना ज्ययांसि च. अनु घेन्मन्दी मघोनः.. (३३) सभी प्रजाएं जिनके अधीन हैं, जिन में च्युत न होने वाली शक्ति एवं जो शत्रु को हराने ebook converter DEMO Watermarks*