ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1184, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपुरुप्रिया ण ऊतये पुरुमन्द्रा पुरूवसू. स्तुषे कण्वासो अश्विना.. (४) हे बहुतों के प्रिय, बहुतों को आनंद देने वाले एवं बहुत धन वाले अश्विनीकुमारो! हम कण्वगोत्रीय ऋषि अपनी रक्षा के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (४) मंहिष्ठा वाजसातमेषयन्ता शुभस्पती. गन्तारा दाशुषो गृहम्.. (५) हे अतिशय महान्, अन्न देने वालों में उत्तम, स्तोताओं को अन्न देने वाले एवं शोभनधन के स्वामी अश्विनीकुमारो! तुम हव्यदाता के घर जाते हो. (५) ता सुदेवाय दाशुषे सुमेधामवितारिणीम्. घृतैर्गव्यूतिमुक्षतम्.. (६) हे अश्विनीकुमारो! सुंदर देवों का यजन करने वाले हव्यदाता के लिए शोभनयज्ञ का साधन एवं नाशरहित भूमि को सींचो. (६) आ नः स्तोममुप द्रवत्तूर्यं श्येनेभिराशुभिः. यातमश्वेभिरश्विना.. (७) हे अश्विनीकुमारो! अपने प्रशंसनीय चाल वाले घोड़ों पर चढ़कर हमारा स्तोत्र सुनने बहुत जल्दी आओ. (७) येभिस्तिस्रः परावतो दिवो विश्वानि रोचना. त्रीँरक्तून्परिदीयथः.. (८) हे अश्विनीकुमारो! तीन दिन और तीन रात तक तुम घोड़ों की सहायता से दीप्ति वाले स्थानों पर आओ. (८) उत नो गोमतीरिष उत सातीरहर्विदा. वि पथः सातये सितम्.. (९) हे प्रातःकाल स्तुतियोग्य अश्विनीकुमारो! हमें गायों से युक्त अन्न एवं उपभोग के योग्य धन दो. हमें उपभोग के लिए मार्ग भी दो. (९) आ नो गोमन्तमश्विना सुवीरं सुरथं रयिम्. वोळ्हमश्वावतीरिषः.. (१०) हे अश्विनीकुमारो! हमारे लिए गायों, घोड़ों, शोभनपुत्रों, सुंदर रथों एवं अन्न से युक्त धन दो. (१०) वावृधाना शुभस्पती दस्रा हिरण्यवर्तनी. पिबतं सोम्यं मधु.. (११) हे शोभन पदार्थों के स्वामी, दर्शन के योग्य व सोने के मार्ग वाले अश्विनीकुमारो! तुम वृद्धि प्राप्त करके मधुर सोम पिओ. (११) अस्मभ्यं वाजिनीवसू मघवद्भयश्च सप्रथः. छर्दैर्यन्तमदाभ्यम्.. (१२) हे यज्ञरूप धन वाले अश्विनीकुमारो! हम धनवानों का सब प्रकार से विस्तृत एवं ebook converter DEMO Watermarks*