भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1185, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1185

हानिरहित घर हो. (१२) नि षु ब्रह्म जनानां याविष्टं तूयमा गतम्. मोष्व१न्याँ उपारतम्.. (१३) हे अश्विनीकुमारो! तुम शीघ्र आकर मनुष्यों की स्तुतियों की रक्षा करो. तुम किसी दूसरे के पास मत जाओ. (१३) अस्य पिबतमश्विना युवं मदस्य चारुण:. मध्वो रातस्य धिष्ण्या.. (१४) हे स्तुतियोग्य अश्विनीकुमारो! तुम हमारे द्वारा दिया हुआ, नशीला, शोभन एवं मधुर सोमरस पिओ. (१४) अस्मे आ वहतं रयिं शतवन्तं सहस्रिणम्. पुरुक्षुं विश्वधायसम्.. (१५) हे अश्विनीकुमारो! हमें सैकड़ों और हजारों प्रकार का, बहुतों द्वारा प्रशंसनीय एवं सबको धारण करने वाला धन वहन करके लाओ. (१५) पुरुत्रा चिद्धि वां नरा विह्वयन्ते मनीषिण:. वाघद्भिरश्विना गतम्.. (१६) हे नेता अश्विनीकुमारो! विद्वान् लोग तुम्हें अनेक स्थानों में बुलाते हैं. तुम अपने वहनसाधन अश्व द्वारा आओ. (१६) जनासो वृक्तबर्हिषो हविष्मन्तो अरङ्कृत:. युवां हवन्ते अश्विना.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! कुश उखाड़ने वाले, हव्य-संपन्न एवं अधिक यज्ञ करने वाले लोग तुम्हें बुलाते हैं. (१७) अस्माकमद्य वामयं स्तोमो वाहिष्ठो अन्तम:. युवाभ्यां भूत्वश्विना.. (१८) हे अश्विनीकुमारो! हमारा यह स्तुतिसमूह तुम्हें सबसे अधिक वहन करने वाला एवं तुम्हारा समीपवर्ती हो. (१८) यो ह वां मधुनो दृतिराहितो रथचर्षणे. तत: पिबतमश्विना.. (१९) हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारे रथ के मध्य भाग में जो सोमरस से भरा हुआ चर्मपात्र रखा है, उससे तुम सोम पिओ. (१९) तेन नो वाजिनीवसू पश्वे तोकाय शं गवे. वहतं पीवरीरिष:.. (२०) हे अन्नरूप धन वाले अश्विनीकुमारो! हमारे पशुओं, पुत्रों एवं गायों के हेतु उस रथ की सहायता से पर्याप्त अन्न सरलतापूर्वक लाओ. (२०) उत नो दिव्या इष उत सिन्धूॅरहर्विदा. अप द्वारेव वर्षथ:.. (२१) ebook converter DEMO Watermarks*