भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1188, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1188

अधस्पदा इच्छैद्यस्य कृष्टयश्चर्मम्ना अभितो जनाः.. (३८) जिस कशु राजा ने मेरी सेवा में सोने के रंग के दस राजाओं को नियुक्त किया, उसी राजा कशु के पैरों के तले सब प्रजाएं रहती हैं. (३८) माकिरेना पथा गाद्येनेमे यन्ति चेदयः. अन्यो नेत्सूरिरोहते भूरिदावत्तरो जनः.. (३९) चेदिवंशीय राजा जिस मार्ग से जाते हैं, उससे दूसरा कोई नहीं जा सकता. कशु की अपेक्षा कोई अधिक दान देने वाला एवं विद्वान् व्यक्ति नहीं है. (३९) सूक्त—६ देवता—इंद्र महाँ इन्द्रो य ओजसा पर्जन्यो वृष्टिमाँ इव. स्तोमैर्वत्सस्य वावृधे.. (१) वर्षा करने वाले मेघ के समान महान् शक्ति वाले इंद्र पुत्रतुल्य स्तोता की स्तुतियों से बढ़ते हैं. (१) प्रजामृतस्य पिप्रतः प्र यद्भरन्त वह्नयः. विप्रा ऋतस्य वाहसा.. (२) आकाश को पूर्ण करने वाले घोड़े जिस समय इंद्र को वहन करते हैं, उस समय विद्वान् स्तोता यज्ञधारण करने वाले स्तोत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति करते हैं. (२) कण्वा इन्द्रं यदक्रत स्तोमैर्यज्ञस्य साधनम्. जामि ब्रुवत आयुधम्.. (३) कण्वगोत्रीय ऋषियों ने स्तोत्रों द्वारा इंद्र को यज्ञ का साधन बनाया है. इसीलिए उन्हें यज्ञ का भाई कहा जाता है. (३) समस्य मन्यवे विशो विश्वा नमन्त कृष्टयः. समुद्रायेव सिन्धवः.. (४) इंद्र के क्रोध से भयभीत होकर सभी प्रजाएं इंद्र को इस प्रकार प्रणाम करती हैं, जिस प्रकार नदियां सागर के सामने झुकती हैं. (४) ओजस्तदस्य तित्त्विष उभे यत्समवर्तयत्. इन्द्रश्चर्मेव रोदसी.. (५) इंद्र जिस शक्ति द्वारा द्यावा-पृथिवी को चमड़े के समान लपेटकर रखते हैं, वह शक्ति स्पष्ट है. (५) वि चिद्वृत्रस्य दोधतो वज्रेण शतपर्वणा. शिरो बिभेद वृष्णिना.. (६) इंद्र ने सौ धारों वाले वज्र द्वारा कांपते हुए वृत्र का सिर काट डाला था. (६) ebook converter DEMO Watermarks*