भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1191, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1191

हे इंद्र! तुमने राजा नहुष की प्रजाओं के सामने शीघ्रगामी घोड़े के समान जो जल दिया था, वह हमें दो. (२४) अभि व्रजं न तत्निषे सूर उपाकचक्षसम्. यदिन्द्र मृळयासि नः.. (२५) हे विद्वान् इंद्र! तुम हमारी गोशाला को पास से देखने में गायों से पूर्ण करो एवं हमें सुखी बनाओ. (२५) यदङ्ग तविषीयस इन्द्र प्रराजसि क्षितीः. महाँ अपार ओजसा.. (२६) हे इंद्र! तुम अपने बल का प्रदर्शन करके धरती के राजा बनते हो. तुम अपने बल के कारण ही महान् एवं अपराजेय हो. (२६) तं त्वा हविष्मतीर्विश उप ब्रुवत ऊतये. उरुज्जयसमिन्दुभिः.. (२७) हे परम व्यापक इंद्र! हव्य धारणकर्त्ता लोग तुम्हें सोमरस द्वारा प्रसन्न करके अपनी रक्षा के लिए स्तुति करते हैं. (२७) उपह्वरे गिरीणां सङ्गथे च नदीनाम्. धिया विप्रो अजायत.. (२८) यज्ञकर्म के कारण इंद्र पर्वत के भागों में एवं नदियों के संगम पर उत्पन्न होते हैं. (२८) अतः समुद्रमुद्वतश्चिकित्वाँ अव पश्यति. यतो विपान एजति.. (२९) जो व्यापक इंद्र सूर्यरूप में संसार में विहार करते हैं, वे ही ऊपर के लोक में स्थित रहकर नीचे की ओर मुंह करके सागर को देखते हैं. (२९) आदित्प्रत्नस्य रेतसो ज्योतिष्पश्यन्ति वासरम्. परो यदिध्यते दिवा.. (३०) इंद्र जिस समय द्युलोक के ऊपर दीप्ति प्राप्त करते हैं, उसी समय लोग प्राचीन एवं जल बरसाने वाले इंद्र की निवासस्थान देने वाली दीप्ति को देखते हैं. (३०) कण्वास इन्द्र ते मतिं विश्वे वर्धन्ति पौंस्यम्. उतो शविष्ठ वृष्ण्यम्.. (३१) हे इंद्र! सब कण्वगोत्रीय ऋषि तुम्हारी बुद्धि एवं पुरुषार्थ को बढ़ाते हैं. हे परम शक्तिशाली इंद्र! वे तुम्हारी शक्ति को भी बढ़ाते हैं. (३१) इमां म इन्द्र सुष्टुतिं जुषस्व प्र सु मामव. उत प्र वर्धया मतिम्.. (३२) हे इंद्र! हमारी इस शोभनस्तुति को स्वीकार करो एवं हमारी भली प्रकार रक्षा करो. तुम हमारी बुद्धि को भी बढ़ाओ. (३२) उत ब्रह्मण्या वयं तुभ्यं प्रवृद्ध वज्रिवः. विप्रा अतक्ष्म जीवसे.. (३३) ebook converter DEMO Watermarks*